यूपी बोर्ड का रिजल्ट कड़ाई के बावजूद बेहतर रहा, पर उन जिलों का रिजल्ट कैसा रहा जहां नकल के बड़े मामले पकड़े गए।
वाराणसी. UP Board Result 2018 की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया गया। योगी राज में कड़ाई से परिक्षाएं होने के बावजूद रिजल्ट बेहतर बना है। हाई स्कूल का परिक्षाफल जहां 75.16 प्रतिशत रहा, जबकि इंटरमीडिएट का रिजल्ट 72.43 फीसद रहा। हालांकि पहले यह माना जा रहा था कि इस बार जो कड़ाई हुई है उसके चलते रिजल्ट के काफी कम रहने का अनुमान लगाया जा रहा था। एक सवाल यह है कि आखिरकार उन जिलों का रिजल्ट कैसा रहा जो नकल के लिये मशहूर हैं और जिन जिलों में सामूहिक नकल के मामले पकड़े गए। इन्हीं जिलों में सबसे ज्यादा परिक्षार्थियों ने परिक्षा भी छोड़ी थी। इनमें पूर्वांचल के गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़ और देवरिया जैसे जिले शामिल हैं।
| इन जिलों का ये रहा रिजल्ट |
| जिला | हाई स्कूल रिजल्ट | इंटरमीडिएट रिजल्ट |
| गाजीपुर | हाई स्कूल- 78.38 % | इंटरमीडिएट- 68.27 % |
| बलिया | हाई स्कूल- 51.57 % | इंटरमीडिएट- 49.86 % |
| चंदौली | हाईस्कूल- 63.11 % | इंटरमीडिएट- 61.75 % |
| जौनपुर | इंटरमीडिएट- 67.72 % | हाईस्कूल- 67.44 % |
| आजमगढ़ | हाईस्कूल- 69.29 % | इंटरमीडिएट- 58.80 % |
बात करें गाजीपुर की तो यह नकल के मामले में सबसे बदनाम जिला रहा है। कड़ाई होते ही यह जिला परिक्षा छोड़ने वालों की लिस्ट में सबसे अव्वल बताया गया। इतना ही नहीं गाजीपुर कड़ाई में नकल माफिया कड़ाई के बाद तो नकल से भी आगे निकल गए। यहां लिखी हुई कॉपियां बदलने के मामले सामने आए। अंदाजा इन दो घटनाओं से लगाया जा सकता है। पहली घटना नंदगंज के सहेड़ी इलाके की है वहां तत्कालीन डीआईओएस ने शिकायत मिलने के बाद शाम साढ़े सात बजे औचक छापेमारी की तो वहां लिखी हुई कॉपियां बदली जा रही थीं। उन्होंने उस कमरे को सील कर दिया और नंदगंज थाने को सूचना भी दी। पर पुलिस ने उस समय तहरीर न मिलने की बात कहकर आरोपियों को जाने दिया था।
नंदगंज थानाक्षेत्र के ही एक स्कूल में भी कॉपियों के बंधन और पिन खुले पाए गए। डीआईओएस ने लिखी हुई कॉपियों के पन्ने बदले जाने की आशंका जतायी थी और इस मामले में एफआईआर कराने की बात भी कही थी। बावजूद इसके गाजीपुर का हाई स्कूल का रिजल्ट 78.38 प्रतिशत रहा, जबकि इंटरमीडिएट का 68.27 प्रतिशत रहा। परिक्षा छोड़ने वालों में यह सबसे अव्वल बताया गया।
बलिया भी नकल के मामले में गाजीपुर से कम बदनाम नहीं रहा है। योगी सरकार ने कड़ाई की तो यहां भी 50 हजार से ज्यादा परिक्षार्थियों ने परिक्षा छोड़ दी। कड़ाई और कैमरों की जद में परिक्षा कराए जाने के बावजूद बलिया में ये हाल रहा कि STF ने छापा मारकर हाई स्कूल के गणित विषय की हल की हुई और सादी उत्तर पुस्तिकाओं के साथ प्रबंधक समेत सात नकल माफिया को गिरफ्तार किया था। इस स्कूल को भी बोर्ड ने डिबार कर दिया है। इसके अलाव एक जगह तो डीएम एसपी की गाड़ी देख नकल माफिया ने नहर में ही छलांग लगा दी। डीएम एसपी बलिया के भीमपुरा क्षेत्र के रामभवन इंटर कॉलेज पहुंचे तो वहां नकल कराने वाले लोगों को भागने की जगह नहीं मिली और वह नहर में कूद गए। बलिया में कड़ाई का असर दिखा। यही वजह रही कि जहां हाई स्कूल का परिणाम महज 51.57 प्रतिशत रहा तो इंटर मीडिएट का सिर्फ 49.86 फीसद रहा। हालांकि यहां हाई स्कूल में फेल होने वालों की संख्या ज्यादा रही जबकि इंटर में उसके आधे से कम। हाई स्कूल में 24 हजार 562 जबकि इंटर में 10 हजार 171 परिक्षार्थी फेल हुए।
चंदौली जिले में तो ऐसा गिरोह पकड़ा गया जो परिक्षा में पास कराने की बाकायदा सुपारी लेता था। पुलिस ने चंदौली के मारूफपुर नदेसर स्थित सद्गुरू इंटर कॉलेज के ठीक पगल स्थित कमरे में छापा मारा तो वहां लैपटॉप, प्रिंटर मोबाइल और हाई स्कूल व इंटर की कॉपियां व पेपर बरामद किये। साथ में कैश 15 लाख रुपये भी मिले। यह कमरा किसी और का नहीं बल्कि प्रिंसिपल का ही था। कमरे में तीन लोग बैठकर कॉपियां लिख रहे थे। पुलिस ने खुलासा किया था कि यहां से पेपर आउट कर कई जिलों में भेजा जाता था। इसके अलावा ये लोग पास कराने की सुपारी भी लेते थे। 17 और 18 फरवरी को भौतिक विज्ञान का पेपर इसी गैंग ने लीक कराया था। यह पूरा पेपर लीक कराने के बजाय उसमें से 20 नंबर का हाथ से लिखा हुआ पेपर बाजार में 500 से 1000 रुपये में बेचवा रहे थे। चंदौली में हाई स्कूल का रिजल्ट 63.11 व इंटरमीडिएट का 61.75 प्रतिशत रहा।
जौनपुर में तो बाकायदा प्रिंटिंग प्रेस पकड़ी गयी जहां बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाएं छापी जा रही थीं। कहा गया कि यहां से छपी हुई कॉपियां नकल माफिया तक जाती थीं। पुलिस ने मालिक समेत तीन लोगों को जेल भेजा। इसके बाद यहां डिप्टी सीएम व शिक्षा मंत्री दिनेश शर्मा बोर्ड परिक्षा में खुद ही औचक निरीक्षण करने बोर्ड परिक्षा केन्द्रों पर पहुंच गए। जौनपुर में इंटर का रिजल्ट 67.72 प्रतिशत रहा जबकि हाई स्कूल का 67.44 प्रतिशत रहा।
आजमगढ़ में सामूहिक नकल के कोई ऐसे मामले तो नहीं पकड़े गए थे पर यहां परिक्षा छोड़ने वालों की तादाद करीब 60 हजार के आस-पास रही थी। यहां हाई स्कूल का परिणाम 69.29 जबकि इंटर का रिजल्ट 58.80 प्रतिशत रहा।