
वाराणसी. यूपी कालेज प्रशासन पर नियमों को ताख पर रख कर पार्ट टाइम शिक्षकों की नियुक्ति करने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने इस संदर्भ में राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल तक शिकायत की है, जिसके बाद राष्ट्रपति भवन से प्रभुख सचिव प्रशासन व राज्यपाल ने वीसी ने शिकायत के संदर्भ में जवाब मांगा है।
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शिकायतकर्ता सुधांशु सिंह का आरोप है कि यूपी कालेज में नियमों को ताख पर रख कर पार्ट टाइम शिक्षकों की नियुक्ति की गयी है। पूर्व सत्र में ही ऐसी नियुक्ति की गयी थी, जिसके बाबत काशी विद्यापीठ के वीसी डा.पी नाग से शिकायत की गयी थी। इस पर वीसी ने यूपी कालेज प्रशासन को पत्र लिखा था, जिसमे कहा गया था कि यूजीसी के नियमानुसार ही नियुक्ति करने की बात कही गयी थी। पत्र में साफ लिखा था कि अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों के नहीं मिलने पर रिटायर शिक्षक से एक निश्चित वेतन पर अध्यापन कराया जाना चाहिए। पत्र में साफ लिखा है कि नियमति या फिर रिटायर शिक्षक नहीं मिलने पर भी पीजी उत्र्तीण अभ्यर्थियों को अध्यापन का अधिकार नहीं दिया जा सकता है यह नियम के विपरित है। सुधांशु सिंह का आरोप है कि यूपी कालेज प्रशासन ने सभी नियमों का दरकिनार करते हुए पीजी उत्र्तीण छात्रों से अध्ययन करना जारी रखा है। पूर्व वर्षों में हुई ऐसी नियुक्ति में कार्यरत पार्ट टाइम शिक्षकों को हटाने की जगह उनकी सेवा विस्तारित कर दी गयी।
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बिना दो विशेषज्ञ बुलाये ही कर ली गयी नियुक्ति
सुधांशु सिंह का आरोप है कि कला के दो विभाग ऐसे हैं, जहां पर बिना दो विशेषज्ञ बुलाये ही विभाग के लोगों ने पार्ट टाइम शिक्षक की अपने स्तर से नियुक्ति कर ली। शासन के नियमानुसार ऐसी नियुक्ति के लिए एक विशेषज्ञ बाहर से बुलाया जाता है जबकि दूसरा विशेषज्ञ विभाग का होता है।
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नहीं मिलते नेट व पीएचडी शिक्षक, पार्ट टाइम से चलाया जा रहा काम
सुधांशु सिंह का आरोप है कि खास लोगों से अध्ययन कराने के लिए ही यूपी कालेज प्रशासन पीजी उत्र्तीण छात्रों से अध्ययन-अध्यापन कराता है। ऐसे शिक्षकों की संख्या ५० से अधिक बतायी जा रही है। यूपी कालेज के प्राचार्य डा.विजय बहादुर सिंह का कहना है कि उनके यहां पर नियमों को ध्यान में रख कर नियुक्ति की जाती है। सिर्फ पीजी पास छात्रों से अध्यापन नहीं कराया जाता है। वैसे भी प्राचार्य पद का कार्यभार हाल में ही संभाला हूं। ऐसा कोई मामला मेरा संज्ञान में आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी।
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