
वाराणसी. माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह के खिलाफ गवाही देने के लिए महिला को पुलिस प्रशासन पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं दे सकी है, जिसके चलते गवाह ने कोर्ट में जाने से इंकार कर दिया है। वकीलों के हड़ताल के चलते भी केस की सुनवाई नहीं हो पायी है। इसके बाद एडीजे प्रथम पीके शर्मा की अदालत ने सिकरौरा नरसंहार के लिए अगली सुनवाई २७ अक्टूबर को निर्धारित करने का आदेश जारी किया है।
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माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह पर सिकरौरा नरसंहार में शामिल होने का आरोप है। इस नरसंकार में लगभग ३५ साल पहले एक ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गयी थी। इस घटना में अन्य लोगों के साथ बृजेश सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। बृजेश सिंह लंबे समय तक फरार चल रहे थे, जिसके चलते इस केस में उनसे जुड़ी पत्रावली अगल कर दी गयी थी और अन्य आरोपी की सुनवाई जारी थी। सिकरौरा नरसंहार के कई आरोपी बरी हो चुके हैं। बृजेश सिंह के गिरफ्तार होने के बाद से इस केस से जुड़ी सुनवाई फिर से आरंभ हुई है और इसी क्रम में मुकदमे की वादिनी हीरावती देवी को सोमवार को गवाही देने के लिए कोर्ट ने तलब किया था, जिसके बाद हीरावती देवी ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर गवाही देते जाते समय पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की थी इस पर कोर्ट ने भी पर्याप्त सुरक्षा देने को कहा था।
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कोर्ट में पुलिस प्रशासन ने दिया यह हलफनामा
एडीजे प्रथम पीके शर्मा की न्यायालय में पुलिस ने प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि वादिनी ने पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलने के चलते गवाही देने आने से इंकार कर दिया है। पुलिस के प्रार्थना पत्र से प्रतीत होता है कि हीरावती देवी अपनी सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं थी इसलिए कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगली तिथि निर्धारित कर दी है।
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बृजेश सिंह को पहले ही लग चुका है झटका
माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह को सिकरौरा नरसंहार में पहले ही झटका लग चुका है। बृजेश से कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि नरसंकार के समय वह नाबालिग थे बृजेश सिंह के प्रार्थना पत्र पर काफी दिनों तक सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना था कि उस समय बृजेश सिंह बालिग थे, जिसके चलते बृजेश सिंह को झटका लग गया था इसके बाद से ही मुकदमे के अगले दौर की सुनवाई शुरू हो गयी है। गौरतलब है कि बृजेश सिंह अधिकांश मुकदमों से बरी हो चुके हैं और सिकरौरा नरसंहार का मुकदमा उनके लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
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