पानी की जांच में बीओडी-सीओडी की मात्रा बहुत ज्यादा, एक बार फिर बेतवा में छोड़े जा रहे अपशिष्ट पदार्थों और दूषित जल ने हजारों मछलियों की जान ले ली। लेकिन यह मामला सिर्फ मछलियों की मौत से ही नहीं, बल्कि नगर के लोगों से भी सीधा जुड़ा हुआ है।
विदिशा. एक बार फिर बेतवा में छोड़े जा रहे अपशिष्ट पदार्थों और दूषित जल ने हजारों मछलियों की जान ले ली। लेकिन यह मामला सिर्फ मछलियों की मौत से ही नहीं, बल्कि नगर के लोगों से भी सीधा जुड़ा हुआ है। प्रदूषण से मरी मछलियों को लोग झोलों में भर-भर कर ले गए और वे फिर बाजार में बिकीं और लोगों की रसोई में पहुंची।
मामला इसलिए और भी संजीदा हो जाता है क्योंकि मछलियों ने वाटरवक्र्स के छोटे बंदा के पास भी बड़ी मात्रा में दम तोड़ा है। यह वह स्थान है जहां से नगर को पेयजल सप्लाई होता है। कहीं अपशिष्ट पदार्थों की खेप वाटर वक्र्स में पहुुंचने वाले पानी में मिलने लगी तो शहर को बड़ा खामियाजा भुगतना होगा। उधर पानी की जांच में बीओडी-सीओडी की मानक स्तर से काफी अधिकता मिली है, जो भारी प्रदूषित जल का सीधा प्रमाण है।
30 जून को भी मरीं थीं मछलियां
बेतवा के विभिन्न घाटों पर 30 जून को भी भारी मात्रा में मछलियों ने दम तोड़ा था। इसके बाद बेतवा के पानी की जांच एसएटीआई के रसायन शास्त्र विभाग को सौंपी गई थी। उस समय प्रारंभिक जांच में बेतवा के पानी में ऑक्सीजन की काफी कमी बताई गई थी। जो ऑक्सीजन न्यूनतम 8 पीपीएम होना चाहिए, वह यहां के पानी में मात्र 3 पीपीएम थी।
छोटा बंदा: दोपहर तक मछलियां बटोरते रहे लोग
शुक्रवार की दोपहर 3 बजे पत्रिका टीम पहुंची वाटर वक्र्स के पीछे से होते हुए छोटे बंदा पर। यहां काफी मात्रा में मछलियां मरी पड़ीं थीं। यहां दो युवक करीब सौ से ज्यादा मछलियों को थैले में भर रहे थे। उन्होंने बताया कि यहां बड़ी मात्रा में मछलियां मरी हैं, इनमें से कुछ को वे अपने घर ले जा रहे हैं। ऐसे कई लोग यहां से मछलियां उठा चुके हैं। जबकि बगुलों ने भी यहां जमकर मछलियों का भोजन किया है।
रामघाट: किनारे पर बदबू मार रहीं मछलियां
बेतवा के रामघाट पर कई जगह पानी के किनारों और पत्थरों पर मरी हुई मछलियों के ढेर लगे थे। यहां दो बच्चों की मौत के बाद ड्यूटी पर आए नगर सैनिक भूपेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि यहां ऐसे ही मरी हुई मछलियां पड़ी हैं, शायद ये कुछ केमीकल या गंदे पानी के कारण मरी हैं। यहां मरी हुई मछलियों के कारण काफी बदबू आ रही थी, जिससे खड़ेे रहना भी मुश्किल हो रहा था।
महलघाट: घाट के किनारों पर पड़ीं थीं मछलियां
बेतवा के महलघाट पर भी मछलियों के ढेर थे। यहां घाट के पत्थरों पर कम लेकिन घाट के किनारों वाले पानी पर मछलियां मरी हुईं पानी की सतह पर पड़ीं थीं। यहां काफी गंदगी दिखाई दे रही थी, मछलियों के कारण बदबू आ रही थी। यहां भी मछली पकडऩे वाले दो लोग मौजूद थे, लेकिन मरी हुई मछलियां बहुत छोटी होने के कारण वे नहीं उठा रहेथे। बताया गया कि बड़ी मछलियां तो लोग सुबह ही ले गए।
चोरघाट नाला: पूरी तेजी से मिल रहा नदी में
वर्षों से चोर घाट नाले को बेतवा में मिलने से रोकने के लिए शहर के तमाम संगठनों और लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई। लेकिन गुठान से होकर शहर की सारी गंदगी अपने में समेटे यह नाला आज भी ज्यों का त्यों बेतवा में मिल रहा है। रामघाट और महलघाट के बीच से होकर बेतवा में मिलने वाले इस नाले को रोकने का साहस न प्रशासन दिखा सका और न ही नगरपालिका। प्रदूषण का बड़ा कारण यह भी है।
यह है बेतवा के पानी की जांच रिपोर्ट
बेतवा के 30 जून को लिए पानी की जांच रिपोर्ट एसएटीआई के रसायन विभाग के एचओडी डॉ आरएन शुक्ल ने दे दी है। उनके अनुसार जहां प्राथमिक रिपोर्ट में पानी में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम मिली थी, वहीं अब विस्तृत रिपोर्ट में यह पाया गया है कि पानी में बीओडी की मात्रा 10 पीपीएम और सीओडी की मात्रा 18 पीपीएम है। यह बहुत ज्यादा है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के मुताबिक पेयजल में बीओडी की मात्रा 0 से 5 पीपीएम तथा सीओडी शून्य होना चाहिए। डॉ. शुक्ल के मुताबिक पानी में ऑक्सीजन की काफी कमी है और बीओडी, सीओडी की अधिकता पानी में प्रदूषण का साफ संकेत है।
मछलियों की मौत एक हफ्ते पहले भी हुई थी, आज फिर हजारों मछलियां मरी हैं और वे बाजार में बेची भी गईं हैं। यह विषय जनस्वास्थ्य से सीधे जुड़ा होने के बावजूद प्रशासन ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई। पहले मछलियों की मौत क्यों हुई थी, इस पर भी गौर नहीं किया गया। कारणों का पता लगाने और उनका निराकरण करने की रूचि प्रशासन में नजर नहीं आती। ऐसे में किसी दिन नगर को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। -प्रमोद व्यास, पर्यावरणप्रेमी
बेतवा में मछलियों का मरना वाकई चिंताजनक और गंभीर है। पूरे मामले का परीक्षण कर जो बेहतर और स्थाई हल हो सकेगा वह करेंगे। -कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, कलेक्टर विदिशा