
Shivraj Singh Chouhan in vidisha (Patrika.com)
MP News: राजनीति में हवा का रुख कब बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कुछ दिन पहले तक जो सत्ताधारी दल के नेता और जनप्रतिनिधि गेहूं उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाओं को कोस रहे थे, सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे, अब उनके सुर पूरी तरह बदल चुके है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता ने विदिशा जिले की उपार्जन व्यवस्था में मानों जादुई सुधार कर दिया है। कल तक जो अव्यवस्थाओ को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे, आज वे ही सब चकाचक होने का राग अलाप रहे हैं। शनिवार को कलेक्ट्रेट में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा सहित रायसेन, सीहोर और देवास के कलेक्टरों व जनप्रतिनिधियो के साथ मैराथन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की।
दिलचस्प पहलू यह रहा कि कुछ समय पहले तक बारदाना और स्लॉट बुकिंग जैसी समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधि अब व्यवस्था की तारीफों के पुल बांधते नजर आए। यह संदेश देने की कोशिश की गई कि अब स्थितियां नियंत्रण में हैं। विधायक मुकेश टंडन, विधायक सूर्य प्रकाश मीणा, विधायक हरिसिंह सप्रे, विधायक हरिसिंह रघुवंशी मौजूद रहे।
उपार्जन के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदिशा जिले में गेहूं खरीदी की स्थिति अब पटरी पर नजर आ रही है। जिले में कुल 87913 किसानों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 72,027 यानी 82 प्रतिशत किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक कर लिया है। खास बात यह कि स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया अभी 23 मई तक जारी रहनी है। अब तक स्लॉट बुक कराने वाले 36,442 किसानों से लगभग 2 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदारी की जा चुकी है। अप्रैल महीने में ही करीब 66 प्रतिशत किसान स्लॉट बुक कर चुके थे, फिर भी राजनीतिक गलियारों में समस्याओं का शोर चरम पर था।
केंद्रीय मंत्री ने चारों जिलों के कलेक्टरों को दो-टूक शब्दों में निर्देशित किया कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। बारदाना उपलब्धता से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया पारदर्शी हो। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने जिले की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि प्रक्रिया सुधारू है। उन्होंने अब तक की स्लॉट बुकिंग, खरीदी, परिवहन व भुगतान की जानकारी दी। विदिशा की स्थिति से केंद्रीय मंत्री संतुष्ट नजर आए। बहरहाल, विदिशा की इस राजनीतिक बयार ने साफ कर दिया है कि जब दिल्ली से कमान कसी जाती है. तो स्थानीय स्तर पर आंदोलन की जमीन रातों-रात प्रशंसा के मैदान में तब्दील हो जाती है।
Published on:
03 May 2026 07:39 pm
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