MP News: कजाकिस्तान से हलाली डैम के लिए उड़ा 'यूरेशियन मेहमान', पाकिस्तान-अफगानिस्तान को पीछे छोड़ पहुंचा धौलपुर 5 देश... 15,000 किलोमीटर और एक ही रास्ता, आज से जिले में शुरू होगी गिद्धों की गणना
MP News: परिंदों की उड़ान के आगे सरहदें और दूरियां बौनी साबित होती हैं। पिछले साल 29 मार्च को विदिशा के हलाली डैम से जिस यूरेशियन ग्रिफिन गिद्ध ने पंख फड़फड़ाए थे, वह अब कजाकिस्तान का 15 हजार किमी लंबा सफर तय कर वापस अपने ठिकाने पर लौट रहा है। वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए यह किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है कि जियो टैगिंग के जरिए ट्रैक किया जा रहा यह पक्षी ठीक उसी रास्ते से वतन लौट रहा है, जिस रास्ते से वह गया था।
यह गिद्ध सतना में घायल अवस्था में मिला था। भोपाल में इलाज के बाद इसे स्वस्थ कर हलाली डैम से जियो टैग लगाकर छोड़ा गया था। डीएफओ हेमंत यादव के अनुसार, यह परिंदा राजगढ़, गुना और जैसलमेर के रास्ते पाकिस्तान, अफगानिस्तान और तजाकिस्तान को पार करते हुए कजाकिस्तान पहुंचा था। वहां करीब एक महीने रुकने के बाद 16 सितंबर को इसने वापसी की उड़ान भरी। वर्तमान में इसकी लोकेशन राजस्थान के धौलपुर में ट्रैक की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही यह हलाली के आसमान में दिखाई देगा।
एक ओर जहां प्रवासी मेहमान की वापसी का उत्साह है, वहीं दूसरी ओर जिले में 20 फरवरी से तीन दिवसीय गिद्ध गणना का आगाज होने जा रहा है। वन विभाग इस दौरान चट्टानों और पेड़ों पर बने घोंसलों की बारीकी से पड़ताल करेगा। फरवरी 2025 की गणना में जिले में 597 गिद्ध (493 वयस्क और 104 अवयस्क) दर्ज किए गए थे, वहीं अप्रैल की गणना में यह संख्या 322 रही थी।
जिले का ग्राम सोंठिया और डंपिंग ग्राउंड इन पक्षियों का पसंदीदा स्थल बन चुका है। यहां सफेद पीठ वाला गिद्ध, भारतीय देसी गिद्ध, राज गिद्ध और इजिप्शियन गिद्ध जैसी दुर्लभ प्रजातियां बड़ी संख्या में मौजूद हैं। पिछली गणना में चट्टानों पर 8 और पेड़ों पर 28 घोंसले मिले थे। विभाग को उम्मीद है कि संरक्षण के प्रयासों से इस बार गिद्धों के कुनबे में और इजाफा होगा।