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घोड़े पर सावर होकर निकला दूल्हा, बेलगाड़ियों पर निकले बाराती, अनोखी बारात की हर तरफ हो रही चर्चा

Unique Wedding Procession : परंपराओं की अनूठी झलक, न डीजे का शोर न आतिशबाजी का धुआं, सिरोंज की गलियों से गुजरी 'विंटेज' बारात ने दिया फिजूलखर्ची रोकने का खास संदेश।
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विदिशा

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Mohammad Faiz Mubarak

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Updated: 8 Feb 2026, 11:41 AM IST

Unique Wedding Procession

बारात में दिखी परंपराओं की अनूठी झलक (Photo Source- Patrika Input)

Unique Wedding Procession : आज के 'शो-ऑफ' वाले दौर में, जहां लाखों रुपए डीजे, आतिशबाजी सहित अन्य ​दिखावे पर खर्च होते हैं, वहां मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज में बैलगाड़ियों पर निकाली ने एक अनोखी बारात ने एक बार फिर 80 के दशक की याद ताजा कर दी। छोटे साउंड सिस्टम पर बजते पुराने गीत 'कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया' ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। बिना शोर-शराबे और धुएं के ये बारात पर्यावरण संरक्षण का एक मूक संदेश दे गई।

अ​धिकांश जगहों पर शादी-बारात में श​क्ति प्रदर्शन जैसा माहौल देखने को मिलता है। मंहगी कारों के काफिले के अलावा हेलीकॉप्टर से भी दूल्हा अपनी दुल्हन लेने के लिए बारात लेकर जाता है। लेकिन, शनिवार को सिरोंज में गजब की बारात देखने को मिली। जिसमें दुल्हा घोड़े पर तो बाराती पारंपरिक रूप से सजी 16 बैलगाड़ियों पर बैठकर आए। यहीं नहीं, ये बारात इसी तरह दुल्हन को लेकर भी गई।

बारात की हर तरफ हो रही चर्चा

आगे दुल्हा घोड़े पर बैठकर जा रहा था और दुल्हन बैलगाड़ी में सजी डोली बैठकर ससुराल की ओर चली जा रही थी। पीछे ढोल नगाड़ों के साथ पुराने दौर के गीत बज रहे थे। इस पल को हर कोई अपने मोबाइल में कैद करने के लिए उतारू था, बिना बुलाए देखने वालों की सड़कों पर भीड़ लगी हुई थी। इस बारात ने आज के दौर में ये अच्छा संदेश दिया कि, फालतू का खर्च शादी-विवाह में ना करते हुए इस तरह सादगी से पैसों की बचत की जा सकती है।

दुल्हा डॉक्टर, दुल्हन ने भी की है मास्टर डिग्री

सिरोंज के नयापुरा निवासी दुल्हा डॉ प्रशांत साद ने भोपाल से बीएएमएस की डिग्री की है और दुल्हन मयूरी बुनकर ने भी केमेस्ट्री से एमएससी की है। जब प्रशांत का रिश्ता रायसेन जिले के सांची निवासी मयूरी से तय हुआ था तब ही दोनों ने इस तरह से बरात निकालने का मन बना लिया। सिरोंज के एक मैरिज गार्डन में विवाह की रस्में पूरी हुई फिर शनिवार को गार्डन से घर तक तीन किमी लंबा वैवाहिक जीवन का पहला सफर दोनों ने बैलगाडि़यों तय किया।

पुरानी परंपरा से बेटे की बरात निकालने का अरमान पूरा

दूल्हे के पिता राजू साद बैंक में जॉब करते है। खेती भी करते है। राजू ने बताया कि, हम अपनी जड़ों और पूर्वजों की परंपरा को नई पीढ़ी को दिखाना चाहते थे। मेरा अरमान था कि अपने बेटे की बारात पुरानी परंपरा से निकालू। जो आज पूरा हो गया है। आज जहां लग्ज़री कारों और महंगी शादियों का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं मैं बैलगाड़ी से बारात निकालकर गोवंश को भी पुन: सबकी जीवन शैली व खेती में देखना चाहता हूं। राहगीर फूलसिंह कुर्मी, नीरज कुर्मी और बुजुर्ग दौपती बाई ने कहा कि बरसों बाद ऐसा सुकून भरा मंजर देखा।