दशहरे की रात हुई लाठीजार्च के विरोध में हुई बैठक
विदिशा. शरद पूर्णिमा के त्यौहार पर सनातनश्री हिन्दू उत्सव समिति ने विदिशा बंद का ऐलान किया है। दशहरे की रात पुलिस और प्रशासन द्वारा बरती गई सख्ती और कई लोगों की पिटाई के विरोध में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। हालांकि व्यापार महासंघ का इस बंद को समर्थन नहीं है। यदि ऐलान के मुताबिक बाजार पूरी तरह बंद रहता है तो त्योहार के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
दशहरे की रात हुई घटना के बाद सनातनश्री हिन्दू उत्सव समिति ने ज्ञापन देकर 24 घंटे में कलेक्टर-एसपी सहित अनेक अधिकारियों को विदिशा से हटाए जाने की मांग की थी। ऐसा नहीं होने पर विदिशा बंद के ऐलान की बात कही गई थी। अवधि बीत जाने के बाद समिति ने अग्रवाल धर्मशाला में बैठक बुलाई और उसमें कई लोगों की असहमति के बावजूद 24 अक्टूबर को विदिशा बंद का ऐलान कर दिया। बैठक में पं. राजीव लोचन पांडेय, महेन्द्र यादव, रविकांत शर्मा, बल्लू महाराज, अतुल तिवारी आदि अनेक लोग मौजूद थे।
ये हो सकती है परेशानी
विदिशा बंद का आह्वान शरदपूर्णिमा पर्व के दिन होने से लोगों को परेशानी हो सकती है। पहले से बंद की जानकारी न होने से भी लोग परेशान होंगे। उधर सबसे ज्यादा परेशानी इस पर्व पर मावे की उपलब्धता पर पड़ेगा। यदि बाजार पूरा बंद रहता है तो मावा नहीं मिल सकेगा। यदि चोरी-छिपे मावा मिला भी तो वह घटिया और मनमाने रेट पर मिलेगा। इसके अलावा अन्य चीजों के लिए भी लोग परेशान होंगे।
बैठक में किसने क्या कहा...
1. अतुल वर्मा- चुनाव आयोग मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराए अथवा कलेक्टर से ऊपर के अधिकारी जांच करें। हमारे ज्ञापन पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है।
2. रविकृष्ण आचार्य- इस वक्त हर वो काम करने की जरूरत है, जिससे प्रशासन पर दबाव बने। कदम कोई भी हो पीछे नहीं हटाना है।
3. घनश्याम बंसल- दशहरे की रात हुई घटना निंदनीय है, लेकिन विदिशा बंद अंतिम हथियार है। पहले ये कोशिश हो कि विरोध के अन्य तरीके अपनाए जाएं।
4. नीरज चौरसिया- त्योहार का समय है, इस वक्त बंद उचित नहीं। बंद को अंतिम हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।
5. संजय पुरोहित- धार्मिक और चुनावी आचार संहिता अलग-अलग है, यह समझना चाहिए। अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई होना चाहिए।
6. राकेश शर्मा- प्रशासन पर दबाव तो बनाना होगा। हालांकि विदिशा बंद अंतिम विकल्प हो।
7. सुजीत देवलिया- हिन्दुत्व पर हमला हुआ है। व्यापारियों को मोह छोडऩा होगा।
8. रुद्रेश पंवार- विदिशा बंद होना चाहिए। जब रात को प्रशासन ने लाठियां चलाईं उस समय हमारे जनप्रतिनिधि कहां थे।
9. जितेन्द्र महाराज- उन नेताओं को चुनाव में सबक सिखाएं, जिनके इशारे पर ये सारी घटना हुई है।
दलाली करते हैं लोग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े आशीष शर्मा को बैठक में बोलने का मौका नहीं दिया गया। बैठक से बाहर आकर बोले- लोग दलाली करते हैं। प्रशासन ने गणेशोत्सव के समय ही आगाह किया था, फिर भी लोग नहीं सुधरे, मंच छोड़कर चले गए। उधर जितेन्द्र जैन ने भी उस दिन प्रशासन के रवैये पर नाराजी जताई।
सनातनश्री हिन्दू उत्सव समिति और हिन्दू संगठनों की बैठक में दशहरे की रात हुई घटना के विरोध में 24 अक्टूबर को विदिशा बंद का निर्णय लिया है।
-संजीव शर्मा, अध्यक्ष सनातनश्री हिउस