डेनमार्क स्थित कोपनहेगन यूनिवर्सिटी की डॉक्टर मरी जेपेडा मैनडोजा ने चमगादड़ों पर रिसर्च की है।
नई दिल्ली: डेनमार्क स्थित कोपनहेगन यूनिवर्सिटी की डॉक्टर मरी जेपेडा मैनडोजा ने चमगादड़ों पर रिसर्च की है। उनका कहना है कि "वैम्पायर चमगादड़ के अंदर ऐसे जीन होते हैं जो खून के हानिकारक तत्वों का सामना कर सकते हैं।" खून में हाई प्रोटीन (93%) और कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट (1%) और विटामिन होते हैं।
हर दिन अपने वजन के आधे के बराबर खून पीते हैं वैम्पायर चमगादड़
उन्होंने कहा कि वैम्पायर चमगादड़ हर दिन अपने वजन का आधा के बराबर खून पीते हैं। ये फल, फूल और कीड़े खाने वाले जीवों की श्रेणी में आते हैं पर उनसे बिल्कुल अलग होते हैं। इनके खून में कम पोषक तत्व होते हैं और ये घातक वायरस के लिए पोषणकारी होते हैं। प्रतिरोधक क्षमता और पाचन के मामले में अन्य चमगादड़ों के मुकाबले वैम्पायर चमगादड़ के जीन अलग तरह से काम करते हैं। उनका कहना है कि चमगादड़ों के आंत के कीड़े भी अलग-अलग तरह के होते हैं। उन्हें चमगादड़ों की मल में 280 तरह के ऐसे बैक्टीरिया पाए जाने के सबूत मिले हैं, जो दूसरे जीवों को बीमार बना सकते हैं।
जीन आैर उनके आंत के कीड़ों पर किया गया रिसर्च
वैम्पायर के गुर्दे हाई प्रोटीन तत्वों को पचाने में सक्षम होते हैं। चमगादड़ कैसे जीते हैं, इस पर काफी अध्ययन हुए हैं, लेकिन उनके जीन पर बहुत कम शोध हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने वैम्पायर चमगादड़ के जीन और उनके उनके आंत के कीड़ों, दोनों का विश्लेषण किया है। उन्होंने पाया कि इनके जीन अन्य चमगादड़ों के मुकाबले छोटे और अलग होते हैं। इनके डीएनए में रोग से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। इनमें खून पचाने की क्षमता भी अधिक होती है और ये वायरल बीमारियों से लड़ सकते हैं।
खून को पचाने के लिए अलग तरह के जीन आैर आंत के कीड़े
जानकारों का कहना है कि वैम्पायर चमगादड़ के आंत के कीड़े फल, फूल और मांस खाने वाले चमगादड़ों से अलग होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये कीड़े पाचन, प्रतिरोधक क्षमता और स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करते हैं। नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन जर्नल में वो लिखती हैं कि खून जैसे विशेष आहार को पचाने के लिए अलग तरह के जीन और आंत के कीड़ों की जरूरत होती है।