अजब गजब

इन महिलाओं को नहीं दी जाती है ब्लाउज पहनने की अनुमति, गुस्ताखी करने पर मिलती है कड़ी सजा

छत्तीसगढ़ की आदिवासी इलाकों में महिलाओं को ब्लाउज पहनने की अनुमति नहीं दी जाती है। इनके यहां इसे गातीमार स्टाइल कहा जाता है।

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May 21, 2018
Gatimar
इन महिलाओं को नहीं दी जाती है ब्लाउज पहनने की अनुमति, गुस्ताखी करने पर मिलती है कड़ी सजा

दुनिया के तमाम हिस्सों में तरह-तरह की परंपराओं का पालन किया जाता है लेकिन दुख की बात ये है कि इन पंरपराओं की गाज अधिकतर महिलाओं के सिर पर ही पड़ी है। बात अगर हमारे देश की करे तो यहां परंपराओं के नाम पर कई सारे ऐसे काम आज भी किए जाते हैं जो कि वाकई में अनुचित है।

परंपराओं के प्रति भले ही लोगों का विश्वास हो या न हो लेकिन समाज के दबाव के चलते उन्हें इनका पालन करना पड़ता है। अब आप छत्तीसगढ़ की इन आदिवासी महिलाओं को ही ले लीजिए जिन्हें साड़ी पहनने की तो इजाजत है लेकिन बिना ब्लाउज के। जहां आज के जमाने में महिलाओं का ब्लाउज के प्रति क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है वही यहां की महिलाओं को ब्लाउज पहनने की अनुमति नहीं दी जाती है।

इन आदिवासी समाजों में इस परंपरा का पालन काफी लंबे समय से होता आ रहा है। इसलिए आज भी यहां लोग इसको मानते हैं। इन समुदायों में यदि किसी महिला ने ब्लाउज पहनने की गुस्ताखी की तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाती है।

कुछ समय पहले यहां की कुछ महिलाओं ने साड़ी के साथ ब्लाउज पहनना शुरू किया तो गांववालों ने उनकी कड़ी निंदा करते हुए उन पर परंपरा को तोड़ने का आरोप लगाया।

बता दें इन इलाकों में बिना ब्लाउज के साड़ी पहनने की प्रथा को गातीमार के नाम से जाना जाता है। करीब एक हजार साल से ये परंपरा इस समाज में चली आ रही है जिसे वजह से यहां महिलाओं को इससे कोई परेशानी भी नहीं होती है।

यहां की महिलाएं खेतों से लेकर घर के घरेलू काम तक बड़ी ही आसानी से कर लेती है और इन्हें इसमें कोई दिक्कत भी नहीं आती है। यहां लोग इस बारे में अपना तर्क देते हुए कहते हैं कि जंगली इलाकों में बहुत गर्मी होती है।

भारी गर्मी के चलते ऐसे साड़ी पहनना इन आदिवासी महिलाओं के लिए सुविधायुक्त होता है। इसके साथ ही इसमें ब्लाउज सिलवाने का खर्च भी नहीं होता है और ये कम से कम समय में तुरंत साड़ी पहन लेती हैं।

Published on:
21 May 2018 10:36 am