अजब गजब

एक गांव जहां जूता चप्पल पहनना है बैन, नियम तोड़ने वाले को मिलती है सजा

हमारे देश में एक ऐसा गांव है जहां चप्पल-जूता पहनना पाप माना जाता है। जी हां, यह सच है आज के इस आधुनिक दौर में इस गांव में लोग वर्षों से बिना चप्पल के रह रहे हैं और इस नियम का पालन भी कर रहे हैं।

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Nov 13, 2018
in this village wearing slippers and shoes is banned
एक गांव जहां जूता चप्पल पहनना है बैन, नियम तोड़ने वाले को मिलती है सजा

नई दिल्ली। बिना चप्पल-जूते पहने कोई बहार निकल जाए ऐसा मुमकिन ही नहीं है। वहीं हमारे देश में एक ऐसा गांव है जहां चप्पल-जूता पहनना पाप माना जाता है। जी हां, यह सच है आज के इस आधुनिक दौर में इस गांव में लोग वर्षों से बिना चप्पल के रह रहे हैं और इस नियम का पालन भी कर रहे हैं। बता दें कि, किसी ने गलती से भी इस नियम तोड़ने की कोशिश की तो उसे कठोर सजा भी मिलती है। मदुरई से 20 किलोमीटर कलिमायन नाम के एक गांव में लोगों ने आजतक पैरों में चप्पल नहीं डाली। स्थानीय लोगों के अनुसार यह प्रथा सदियों से यहां के लोगों द्वारा निभाई जा रही है। आइए हम आपको इस प्रथा का पालन करने के पीछे की वजह बताते हैं। दरअसल यहां के लोग अपाच्छी नाम के देवता का सदियों से आह्वाहन करते आ रहे हैं। गांव के लोगों के अनुसार देवता अपाच्छी उनकी सदियों से उनकी रक्षा करते आ रहे हैं और उन्हीं के आशीर्वाद से आज ये लोग कुशल मंगल है।

देवता अपाच्छी के प्रति आस्था दिखाने के लिए यहां के लोग आदरभाव के साथ जूता चप्पल त्यागकर अपना जीवन जी रहे हैं। यहां के लोगों के अनुसार, अगर इस प्रथा का पालन नहीं किया जाए तो इनके इष्ट देवता नाराज़ हो जायेंगे और इस गांव पर भयंकर प्रकोप आ सकता है। गांव को इसी प्रकोप से बचाने के लिए यह अनोखा गांव पीढ़ियों से इस नियम का पालन करता चला आ रहा है। इतना ही नहीं यहां बहार से आने वाले लोगों को भी इस नियम का पालन करना पड़ता है। हालांकि, इस गांव की सीमा से बाहर जाते है तब ये नियम लागू नहीं होता। इस प्रथा से यह साफ होता है कि गांव वाले अपने गांव को देवस्थान से कम नहीं मानते अब जैसे मंदिर में प्रवेश करने से पहले लोग जूते-चप्पल निकाल कर जाते हैं वैसा ही यह नियम है।

Published on:
13 Nov 2018 05:47 pm