अजब गजब

One Day Prime Minister: 1 दिन के प्रधानमंत्री का बड़ा रोचक है यह सियासी किस्सा

Prime Minister of One Day: यूं तो कहते हैं की फिल्में हम इंसानों की जिंदगी पर ही आधारित होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं भारतीय राजनीति में घटी फिल्मी कहानी जैसी इस अनोखी घटना के बारे में?

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नई दिल्ली। One Day Prime minister: क्या आपको नायक फिल्म याद है जिसमें अभिनेता अनिल कपूर को 1 दिन का मुख्यमंत्री बना दिया जाता है। लेकिन यह कहानी केवल फिल्मी पर्दे तक ही सीमित नहीं है बल्कि असल जिंदगी से जुड़ा हुआ एक ऐसा ही रोचक किस्सा भी है।

भारत देश को तो 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिल गई परंतु गोवा के साथ दादर और नगर हवेली पर उस समय भी विदेशी शासन कायम था। पुर्तगाल इन तीनों स्थानों को ना छोड़ने की बात पर अडिग था। पुर्तगाली सरकार के इस दृढ़ निश्चय को अंतरराष्ट्रीय राय भी हिला नहीं पाई। जिस कारण से राष्ट्रवादियों ने गोवा में पुर्तगाल के विरुद्ध अभियान प्रारंभ कर दिया। क्योंकि तीनों ही स्थानों की एकमात्र अभिलाषा आजादी थी।

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उस समय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वालों की मदद करने के लिए बेहतरीन पार्श्व गायिका लता मंगेशकर ने भी सहयोग किया। उन्होंने पुणे में अपने एक कार्यक्रम के जरिए चंदा इकट्ठा कर आजादी का युद्ध लड़ने वाले लोगों के लिए हथियार खरीदने में मदद की। इतनी कठिनाइयों के बाद अंततः 21 जुलाई 1954 को दादर पुर्तगालियों के राज से मुक्त हो गया। जिसके 2 सप्ताह बाद ही हवेली को भी आजादी मिल गई। यह आजादी का जश्न राष्ट्रीय ध्वज फहराकर और राष्ट्रगान गाकर मनाया गया।

स्वतंत्रता मिल जाने पर दादर हवेली की वरिस्ता पंचायत का निर्माण किया गया। जो 1 जून 1961 तक कायम रही। लेकिन अभी भी एक संघीय क्षेत्र के रूप में दादर हवेली का भारत देश में आधिकारिक विलय नहीं हो पाया था। जिसके कारण प्रशासन पर काबू पाने के लिए भारत सरकार द्वारा एक दूत को भेजा गया। गुजरात कैडर के आईएएस अफसर के.जी. बदलानी को यह दायित्व सौंपा गया।

इसके साथ ही 1 दिन के प्रधानमंत्री बनने पर केजी बदलानी ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। जिसके परिणाम स्वरूप दादर और नगर हवेली आधिकारिक रूप से भारत में विलय हो गई।

Updated on:
06 Sept 2021 03:11 pm
Published on:
06 Sept 2021 03:09 pm
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