हम आपको एक एेसा आदमी के बारे में बता रहे हैं, जो अपनी दमा की बीमारी को ठीक करने के लिए चूना आैर मिट्टी खाने लगा।
नई दिल्लीः बीमार ठीक करने के लिए आमतौर पर लोग दवा लेते हैं, या देशी इलाज करते हैं। लेकिन आज हम आपको एक एेसा आदमी के बारे में बता रहे हैं, जो अपनी दमा की बीमारी को ठीक करने के लिए चूना आैर मिट्टी खाने लगा। ये काम वो पिछले 15 से कर रहे हैं।
पूरी तरह स्वस्थ्य हैं बरसातू
जौनपुर के करीमपुर बिन्द गांव में रहने वाले बरसातू वर्मा की पिछले 15 सालों से रोज मिट्टी और चूना खा रहे हैं। इसके बाद भी वह पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। जानकारी के मुताबिक, करीब 15 साल पहले ही बरसातू को दमा की बीमारी का पता लगा था। वह इलाज कराने के लिए दूसरे शहर भी गए, लेकिन ठीक नहीं हो पाए। वह वापस अपने गांव लौट आए आैर कुछ दिन बाद से ही उन्होंने मिट्टी खाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह मिट्टी के साथ चूना भी खाने लगे।
ठीक हो गई दमा की बीमारी
बरसातू की मानें तो मिट्टी आैर चूना खाने के बाद से उसकी बीमारी ठीक हो गइर्। अब उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होती है। बता दें, बरसातू की मिट्टी और चूना खाने की बात को सुनकर कोरिया से भी कुछ लोग उसे मिलने आ चुके हैं। उसे सम्मानित भी किया जा चुका है।
क्या कहते हैं जानकार
जानकारों की मानें तो हमारे देश के कई भागों में मिट्टी में आर्सेनिक और सीसे के समान विषैले रसायन बहुतायत से पाए जाते हैं। पीने के पानी और खाद्य पदार्थों के साथ ये शरीर में पहुंचते ही हैं, मिट्टी खाने से इनकी अतिरिक्त मात्रा शरीर में पहुंचती है। इसी प्रकार रासायनिक कारखानों, पेट्रोल पंपों, कपड़ों की रंगाई और चमड़े की कमाई करने वाले, कीटनाशक बनाने वाले कारखानों आदि से भी विषैले पदार्थ निकल कर आसपास की मिट्टी में मिलते रहते हैं।
कई डॉक्टर यह मानते हैं कि बच्चों का मिट्टी खाना उनके प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है, लेकिन भारत और उसके समान विकासशील देशों में, जहां सफाई के मानक काफी शिथिल हैं, बच्चों का मिट्टी खाना कुल मिलाकर हानिकारक ही होता है।