अजब गजब

इस जवान के एक हाथ में बंदूक, दूसरे हाथ में रहती है ऐसी चीज जिसे देख लोग उपरवाले को करने लगते हैं याद

आजीविका के रूप में देशभक्ति की राह चुनने वाले ज्योतिमोन का संगीत से भी अटूट नाता है।

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Aug 13, 2018
इस जवान के एक हाथ में बंदूक, दूसरे हाथ में रहती है ऐसी चीज जिसे देख लोग उपरवाले को करने लगते हैं याद

नई दिल्ली। जिस तरह द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने एक हाथ में चक्र यानी हथियार और दूसरे हाथ में बांसुरी यानी प्रेम संगीत के साथ जनमानस को सत्य की जीत का एक संदेश दिया था, ठीक उसी तरह केरल के एक छोटे से गांव पिथनापिरम जिला कोलम के निवासी ज्योतिमोन अपना जीवन जी रहे हैं। आजीविका के रूप में देशभक्ति की राह चुनने वाले ज्योतिमोन का संगीत से भी अटूट नाता है। जब वे अपनी ड्यूटी पर नहीं होते तो भी वे एक और तपस्या कर रहे होते हैं बांसुरी से मीठी तान निकालने की। साधारण बांसुरी बजाने के बाद उन्होंने हाल ही देश की राजधानी दिल्ली जा कर मशहूर बांसुरी प्रतिष्ठान से बीस हजार रुपये की बांसुरी का सेट खरीदा है, जिसमें 12 बेहतरीन किस्म की बांसुरी हैं जो अलग-अलग स्केल की है। एक सिपाही का दिल्ली जा कर बेहद महंगी बांसुरी खरीदना उनके संगीत के प्रति जुनून को ही दर्शाता है।

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उनके सहकर्मियों ने बताया कि ज्योतिमोन जिस निष्ठा से भारत ही नहीं, पूरे विश्व के सबसे बड़े अर्धसैन्य बल सीआरपीएफ की सेवाओं में समर्पण भाव से कर्तव्य निर्वहन करते हैं, बिल्कुल वही भाव ड्यूटी से फारिग हो कर एक और ड्यूटी संगीत सेवा के लिये भी समर्पित हो जाते हैं। सीआरपीएफ 188वीं बटालियन में सिपाही के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे ज्योतिमोन से बटालियन के बड़े अफसर भी खासे प्रभावित हैं। इतने कि बल के किसी भी रंगारंग आयोजन में ज्योतिमोन को अवसर दिया जाना सबसे पहले तय कर दिया जाता है। आमतौर पर उनका बांसुरी बादन ही कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भी बन जाता है। चूंकि ज्योतिमोन दक्षिण भारतीय से हैं, तो पहले तो वे दक्षिण भारतीय भाषाओं की धुनों को ही बजाते थे, पर सीआरपीएफ की 116 बटालियन की नौकरी के दौरान वे 6 साल तक कश्मीर में रहे और अभी बटालियन 188 में लगभग तीन सालों से बस्तर में कार्यरत हैं, वे हिंदी फिल्मों व लोकगीतों की भी धुनों को शानदार तरीके से बजाते हैं। हीरो फिल्म की सिग्नेचर बांसुरी की धुन तो ऐसे बजाते हैं, जैसे वह उनकी ही बनाई धुन हो।

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Published on:
13 Aug 2018 01:14 pm
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