मेनोपॉज यानी रजोनिवृति महिलाओं में सामान्य शारीरिक बदलाव है, लेकिन यदि यह समय से पहले हो जाए तो चिंता की बात है। अधिकांश महिलाओं के पास मेनोपॉज तक आने वाले वर्षों से निपटने की प्रासंगिक जानकारी नहीं होती। बदलती लाइफस्टाइल के चलते अब 38-40 वर्ष की उम्र में पीरियड्स बंद होने या प्री-मैच्योर ओवेरियन फेलियर के मामले आने लगे हैं। 30 वर्ष के बाद महिलाएं अपनी मैन्स्ट्रुअल हैल्थ का ध्यान रखें।

मेनोपॉज यानी रजोनिवृति महिलाओं में सामान्य शारीरिक बदलाव है, लेकिन यदि यह समय से पहले हो जाए तो चिंता की बात है। अधिकांश महिलाओं के पास मेनोपॉज तक आने वाले वर्षों से निपटने की प्रासंगिक जानकारी नहीं होती। बदलती लाइफस्टाइल के चलते अब 38-40 वर्ष की उम्र में पीरियड्स बंद होने या प्री-मैच्योर ओवेरियन फेलियर के मामले आने लगे हैं। 30 वर्ष के बाद महिलाएं अपनी मैन्स्ट्रुअल हैल्थ का ध्यान रखें।
समझें पीरियड्स और मेनोपॉज को
जन्म के साथ लडक़ी की ओवरी में अंडे बन जाते हैं। 12 से 14 साल के बीच अंडाशय पूरी तरह विकसित हो जाता है। हर माह एक अंडा ओवरी से फैलोपियन ट्यूब में आता है। इस दौरान हार्मोन एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रोन बनते हैं। इनके कारण गर्भाशय की रक्त और म्यूकस से बनी परत(एंडोमेट्रियम) मोटी हो जाती है। हर माह एंडोमेट्रियम उस अंडे के साथ मिलकर रक्त के रूप में योनि से बाहर निकलती है जिसे पीरियड्स कहा जाता है। जब महिला की उम्र 48-50 वर्ष के बीच हो जाती है तो यह समय मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति का होता है जिसमें पीरियड्स बंद हो जाते हैं और हार्मोन स्त्रावित होना बेहद कम हो जाते हैं।
पेरी-मेनोपॉज रजोनिवृत्ति के आसपास का समय होता है। कई बार महिलाओं के 40 वर्ष की उम्र के आसपास मासिक धर्म बंद हो जाता है। पेरी-मेनोपॉज के दौरान महिलाएं कई तरह की दिक्कतों से गुजरती हैं जिसमें पीरियड्स बेहद कम या अधिकता में होते हैं। मूड स्विंग्स होते हैं। अधिकतर लोगों में यह धारणा होती है कि यह समय पीरियड्स जाने का है तो ऐसे समय में ये दिक्कतें होती ही हैं। लेकिन 40 वर्ष के बाद यदि पीरियड्स अनियमित, हैवी या बेहद कम होने जैसी समस्याएं होती हैं तो उसकी अनदेखी न करें। चिकित्सकीय सलाह बहुत जरूरी है।
यह पड़ता प्रभाव
पेरी-मेनोपॉज और प्री-मेनोपॉज से महिलाओं की सेहत पर असर पड़ता है। समय से पहले ही उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। चिड़चिड़ाहट, चेहरे पर पसीना होना, नींद न आना, वजन बढऩे जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। बीपी-शुगर में उतार-चढ़ाव देखा जाता है।
डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान दें
महिलाओं को 40 वर्ष की उम्र के बाद विशेष रूप से डाइट और एक्सरसाइज पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें कैल्शियम रिच डाइट लेनी चाहिए। हरी सब्जियां, फाइबर युक्त चीजें, मोटे अनाज का सेवन करना चाहिए। व्यायाम और वॉक बेहद जरूरी है। क्योंकि यह समय वजन बढऩे का भी होता है।