डॉ.योगी गोस्वामी मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं। स्कूली शिक्षा के बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है
डॉ.योगी गोस्वामी मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं। स्कूली शिक्षा के बाद दिल्ली स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके बाद अमरीका चले गए थे जहां ऑबर्न यूनिवर्सिटी से मास्टर इन साइंस के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी किया। ये नॉर्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में 1977 में अस्सिटेंट प्रोफेसर बने। 1990 में फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी जॉइन किया जहां मैकेनिकल एंड एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के हैड बनें। सोलर एनर्जी कनवर्जन लैबोरेटरी के निदेशक भी रह चुके हैं। 2005 से यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा के क्लीन एनर्जी रिसर्च सेंटर में काम करने का अनुभव है।
चर्चा में
हाल ही इनके द्वारा तैयार एयर प्यूरीफायर को मार्केट में लाने के लिए बेटे दिलीप और बेटी जया ने मॉलीक्यूल इंक कंपनी खोली है। इससे घर के भीतर वायु प्रदूषण को खत्म करने के साथ नवजात बच्चों को एयर पॉल्युशन से होने वाली गंभीर रोगों से बचाया जा सकेगा।
बच्चों के लिए बनाया फिल्टर
एयर प्यूरीफायर का काम शुरू करने से पहले दुनियाभर में श्वांस संबंधी रोगों को लेकर स्टडी की। इन्होंने देखा कि दुनिया में बच्चों को अस्थमा की शिकायत पिछले वर्षों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। इसके बाद इन्होंने तय किया कि बच्चों की जान बचाने के लिए ऐसा फिल्टर बनाएंगे जिससे बच्चों में संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा।
मॉलीक्यूल प्यूरी-फायर बनाया
एयर प्यूरीफायर लगाने का औसतन खर्च 800 अमरीकी डॉलर करीब (51 हजार) रुपए है। ऐसे अन्य एयर प्यूरीफायर को लगाने पर 70 से 80 हजार रुपए का खर्च आता है। मॉलीक्यूल एयर प्यूरीफायर सस्ती दर पर मिलने से दुनिया में तेजी से फैल रही सांस संबंधी बीमारियों को समय रहते रोका जा सकता है।
सोलर एनर्जी से बिजली बनाते हैं
सौर ऊर्जा से बिजली बनाने के एक्सपर्ट हैं। अब तक करीब दो हजार घरों में छोटे स्तर का सोलर प्लांट लगा चुके हैं जहां सामान्य उपकरणों को चलाने के लिए बिजली आसानी से पैदा की जा रही है। इन्होंने एक खास तरह की टर्बाइन डिजाइन की है जो सूरज ढलने पर हवा के दबाव से चलती है और उससे ऊर्जा पैदा होती है। बादल और बारिश के मौसम में भी इस आधुनिक सोलर प्लांट से बिजली बनाई जा सकती है।
कीटाणुओं को मारता इनका प्यूरीफायर
अमरीका जाने का उद्देश्य सोलर एनर्जी (सौर उर्जा) के क्षेत्र में शोध करना था जिससे इसका बेहतर प्रयोग हो सके। इसी बीच इनके बेटे दिलीप को एक्यूट अस्थमा की शिकायत हो गई जिस वजह से इनका पूरा परिवार परेशान रहने लगा। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को घर की हवा में मौजूद दूषित कण बच्चे की श्वांस नलिका को संक्रमित कर रहे हैं। इसपर इन्होंने ऐसा एयर प्यूरीफायर तैयार करने की ठानी जो हवा को साफ करने के साथ उसमें मौजूद कीटाणुओं को खत्म करता है।
ऐसे काम करता इनका प्यूरीफायर
इन्होंने हेपा फिल्टर्स की जगह फिल्टर मेंबरेन में नैनो पार्टिकल्स के इस्तेमाल से सिलेंडर तैयार किया। जैसे ही कमरे के भीतर रोशनी एयर प्यूरीफायर से टकराएगी तो रोशनी में मौजूद प्रदूषित कण को प्यूरीफायर के भीतर लगे नौनो पार्टिकल्स खंडित कर अपने भीतर खींच लेता है। इससे सूक्ष्म से सूक्ष्म प्रदूषित कण भी पूरी तरह खत्म हो जाता है।
2004 व 2005 में इंटरनेशनल सोलर एनर्जी सोसाइटी व इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सोलर एनर्जी के अध्यक्ष भी रहे हैं।
2016 में सोलर एनर्जी के बेहतर उपयोग के लिए डिजाइन किए गए उपकरणों के लिए इन्हें फ्लोरिडा इनवेनटर्स हॉल ऑफ फेम से सम्मानित किया गया था।
2017 में टाइम मैगजीन ने टॉप-२५ सर्वश्रेष्ठ इनोवेटर्स की सूची में इन्हें जगह मिली थी। कहा था कि तेजी से बदल रही दुनिया में सभी को संसाधनों को बचाने के लिए प्रयास करने होंगे।