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मोटिवेशन : आर्थिक संकट के समय न हारें हिम्मत

एक नई शुरुआत करके स्थिति को सही करने की कोशिश की जाए तो किसी भी स्थिति में सुधार आ सकता है।

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Dec 30, 2017
financial crisis

एक नई शुरुआत करके स्थिति को सही करने की कोशिश की जाए तो किसी भी स्थिति में सुधार आ सकता है। आप किसी भी आर्थिक मुसीबत में फंसी हों तो घबराएं नहीं, बल्कि शांति पूर्वक बैठकर विचार करें। सोचें, कि किन-किन नए तरीकों से इससे बाहर निकला जा सकता है।

नौ करी चले जाना, जालसाजी, कानूनी समस्या या कर्ज, वित्तीय संकट के कई बहाने हो सकते हैं लेकिन इस संकट से उबरना नामुमकिन नहीं है। समझदारी के साथ कदम से कदम बढ़ाकर इस संकट से बाहर निकला जा सकता है। यह तो साफ है कि किसी के भी जीवन में आर्थिक संकट एक बड़ी उथल-पुथल लेकर आता है। यह न केवल आपके स्थायीत्व को हिला देता है, बल्कि आपकी खुशियों की भी बलि लेता है। मुश्किल होने पर भी इस स्थिति में रुककर अच्छे वक्त पर आंसू न बहाएं।

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डर के चक्रव्यूह में न फंसें

इसमें कोई शक नहीं है कि आर्थिक संकट के दौरान आपको अपने घर, जीवन, सुख-सुविधाओं की चिंता सताती है। जिंदगी आपको मायूसी के भंवर में फंसी नजर आती है लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि परिणामों पर पूरी तरह विचार करने से पहले अपनी प्रतिक्रिया जाहिर न करें। अपनी इस परिस्थिति को शांतचित्तता के साथ देखें। खुद को और इस परिस्थिति को फिर से सुधारने की क्षमता पर विचार करें।

जो है उसके बारे में सोचें

संकट की तीव्रता को देखते हुए उपलब्ध विकल्पों पर विचार करें। सबसे पहले अपने परिवार या पार्टनर से मशविरा करें। एक योजना बनाएं कि आप कैसे अपने जरूरी बिल अदा करेंगी, कौनसे खर्च कम कर सकती हैं और कोई दुर्घटना होने पर आप क्या करेंगी? अपने परिचितों में ऐसे लोगों की पहचान करें जिनका सहारा आप ले सकती हों।

संपत्ति का आंकलन करें

आपकी और आपके घर से जुड़ी मूल्यवान वस्तुएं आपकी संपत्ति का हिस्सा हैं। एक ऐसी सूची बनाएं, जिसमें निवेश, नकद, बचत खातों और बॉन्ड्स का हिसाब अलग हो और आपकी कार, गहनों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का अलग। इसमें से जो भी तुरंत बेचा जा सकता हो उसकी जानकारी लें। अपने वित्तीय सलाहकार से बात कर स्थिति को जानें।

अहम् नहीं

इस संकट के समय अपने अहम् को एक तरफ रख दें। किसी से मदद मांगने से आप छोटी नहीं हो जाएंगी।

भावनाओं पर काबू रखें

वित्तीय संकट आपको निराशा से भर देता है। हताश होने से पहले इस बारे में भी जरूर सोचें कि ग्लानि, चिड़चिड़ाहट, गुस्सा और दोषारोपण जैसे नकारात्मक भाव उस व्यक्ति पर क्या प्रभाव डालेंगे, जो आपकी मदद करना चाहता हो? कुढऩे से अच्छा है किसी अपने के साथ अपनी भावनाओं के बारे में बात करें और सलाह लें। खुद से पूछें कि गलती कहां हुई और आगे के लिए खुद को तैयार करें।

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