
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दूसरी बार अमेरिका (United States of America) का राष्ट्रपति बनने के बाद से ही वीज़ा (VIsa) से जुड़े नियमों में सख्ती देखने को मिल रही है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अब तक वीज़ा से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया गया है। इससे वीज़ा आवेदकों को काफी परेशानी भी हो रही है। वीज़ा नियमों में सख्ती के नाम पर अंतर्राष्ट्रीय छात्रों (Foreign Students) की परेशानी भी बढ़ गई है, जिससे अमेरिकी सीनेटर भी नाराज़ हैं।
अमेरिका में एकेडमिक सीज़न शुरू होने को है और भारत समेत कई अन्य देशों के छात्रों को छात्र वीज़ा के लिए अपाइंटमेंट भी नहीं मिल रहे हैं। इसे देखते हुए अब 30 अमरीकी सीनेटरों ने विदेश विभाग से नाराज़गी जताई है। साथ ही शैक्षणिक अध्ययन, वोकेशनल पाठ्यक्रमों और एक्सचेंज प्रोग्रामों के लिए दिए जाने वाले एफ, एम और जे वीज़ा प्रोसेसिंग में हो रही देरी पर स्पष्टीकरण मांगा है। इन 30 सीनेटरों ने विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) को पत्र भेज कर कहा है कि उन्हें छात्रों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि उन्हें अमेरिकी दूतावासों और उच्चायोगों में समय पर वीज़ा अपाइंटमेंट नहीं मिल पा रहे हैं।
वीज़ा को लेकर दिक्कतों का असर सबसे ज़्यादा भारतीय छात्रों पर पड़ा है जो फॉल 2026 इंटेक के लिए अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों में जाने की तैयारी में लगे हैं। अमेरिका में पढ़ने वाले या पढ़ने की इच्छा रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में सबसे ज़्यादा भारत से ही होते हैं। वर्ष 2024-25 में अमेरिका में भारत से लगभग 3.6 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे थे। इमिग्रेशन से जुड़े एक्सपर्ट्स के अनुसार विभाग में वर्कर्स की कमी और इंटरव्यू की कड़ी प्रक्रिया के कारण वीज़ा मिलने में अभूतपूर्व देरी हो रही है। आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच के कारण यह देरी और बढ़ गई है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने सभी आवेदकों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया है।
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए उपलब्ध कैरीकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (सीपीटी) प्रोग्राम की निगरानी बढ़ा दी है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को चेतावनी दी है कि सीपीटी के नियमों का गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर संस्थानों और संबंधित अधिकारियों को प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।