अमेरिका भी अब भारत और रूस की राह पर चलते हुए अपनी मिलिट्री स्ट्रैटेजी में एक बड़ा बदलाव कर सकता है। कैसे? आइए जानते हैं।
युद्ध के तरीकों में अब काफी बदलाव हो गया है। यूक्रेन (Ukraine) के खिलाफ युद्ध में रूस (Russia) ने ड्रोन्स का इस्तेमाल करते हुए तबाही मचा दी। पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) में भारत (India) ने भी ड्रोन्स का इस्तेमाल किया और 9 पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों को तबाह करते हुए सैकड़ों आतंकियों को भी मार गिराया। जंग में ड्रोन्स काफी असरदार साबित हो रहे हैं और मिसाइलों और अन्य एडवांस हथियारों की तुलना में ये कम महंगे होते हैं। ऐसे में अब अमेरिका (United States Of America) ने भी भारत और रूस की राह पर चलने का फैसला लिया है।
मिलिट्री ऑपरेशंस में ड्रोन्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमेरिका भी अपनी मिलिट्री स्ट्रैटेजी में बदलाव करने की सोच रहा है। अमेरिका भी अब अपनी सैन्य ताकत और और मज़बूत करने के लिए 'ड्रोन आर्मी' बनाने पर फॉय्स करेगा और ज़्यादा से ज़्यादा ड्रोन्स बनाने पर काम करेगा। सामान्य तौर पर अमेरिकी हथियार काफी एडवांस होते हैं, लेकिन काफी महंगे भी होते हैं। ऐसे में अमेरिका अब सस्ते ड्रोन्स बनाकर अपनी सैन्य क्षमता को और धारदार बनाने पर ध्यान दे सकता है।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने भी इस बारे में निर्देश दे दिए हैं और यह साफ कर दिया है कि ड्रोन बनाने में अब किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए ज़रूरी पार्ट्स की खरीद हो या दूसरा कोई भी ज़रूरी काम, बिना किसी रुकावट के पूरा होना चाहिए।