बांग्लादेश के 12 फरवरी आम चुनावों के नतीजों के बाद सियासी माहौल गरमा गया है, ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में 40% सीटों पर अनियमितताओं के आरोपों ने चुनाव आयोग और प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए आम चुनावों के परिणामों के बाद राजनीतिक माहौल और भी गरमाता जा रहा है। इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बड़ी सफलता मिली, जबकि कट्टरपंथी इस्लामिक दल जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड 68 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर कब्जा किया। हालांकि चुनाव के बाद उठते विवादों और आरोपों ने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद युनुस ने इस चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष बताते हुए इसका स्वागत किया था, लेकिन अब उन दावों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (TIB) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगभग 40 प्रतिशत संसदीय सीटों पर किसी न किसी प्रकार की अनियमितता पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, 28.6 प्रतिशत सीटों पर उम्मीदवारों ने स्वयं गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई, जिससे यह साबित होता है कि आरोप केवल अनुमान नहीं हैं, बल्कि सीधे चुनावी प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए हैं।
TIB की रिपोर्ट में सबसे गंभीर आरोप चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में उन संगठनों और व्यक्तियों को मान्यता दी गई, जिनका संबंध किसी न किसी राजनीतिक दल से था। इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ है। इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि एक प्रमुख संस्था ने कई बार आवेदन करने के बावजूद पर्यवेक्षक के रूप में पंजीकरण नहीं प्राप्त किया, जबकि अंतरिम सरकार के सलाहकारों से जुड़े दो संस्थानों को मंजूरी दे दी गई। इस प्रकार के फैसलों ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग ने विदेशी पर्यवेक्षकों को भुगतान किया। आलोचकों का कहना है कि जिस संस्था की निगरानी की जानी है, वही संस्था पर्यवेक्षकों को भुगतान करती है, इससे हितों का टकराव उत्पन्न हो सकता है, जो चुनावी वैधता पर प्रश्नचिह्न लगा सकता है। यह कदम चुनाव की निष्पक्षता पर और भी संदेह पैदा करता है।
बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव चिह्नों के आवंटन को लेकर भी असंतोष जताया है। इसके अलावा, TIB ने उम्मीदवारों द्वारा दाखिल हलफनामों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में यह पूछा गया है कि क्या उम्मीदवारों की आय और संपत्ति के स्रोतों का सही तरीके से सत्यापन किया गया था, और क्या वे कानूनी रूप से अर्जित थे? इन सवालों के सामने आने के बाद बांग्लादेश में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर बहस और भी तेज हो गई है।