17 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ये हैं दुनिया के सबसे महंगे देश, पहले नंबर वाले के राष्ट्रपति को अमेरिका ने किया गिरफ्तार, पांचवें वाले से छिड़ सकती है जंग

महंगाई दर किसी देश की आर्थिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक होती है। फरवरी 2026 में भारत की खुदरा महंगाई 2.75% रही, जबकि वेनेजुएला में यह 269.9% तक पहुंच गई।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Devika Chatraj

Feb 17, 2026

महंगाई का सीधा अर्थ है वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि। जब बाजार में चीजें महंगी होती जाती हैं, तो समय के साथ पैसे की क्रय शक्ति घटने लगती है। यानी आज जो सामान 100 रुपये में मिलता है, वही कुछ समय बाद ज्यादा कीमत पर खरीदना पड़ता है। इसी वजह से महंगाई दर किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का सबसे अहम संकेतक मानी जाती है।

फरवरी 2026 के आंकड़ें

फरवरी 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नई सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) सीरीज के आधार पर भारत की खुदरा महंगाई दर जनवरी में बढ़कर 2.75% हो गई है। वहीं खाद्य महंगाई 2.13% दर्ज की गई। वर्तमान में भारत की महंगाई दर वैश्विक स्तर पर अपेक्षाकृत नियंत्रित मानी जा रही है, जो यह संकेत देती है कि आर्थिक मोर्चे पर स्थिति संतुलित है।

अधिक महंगाई वाला देश

अगर दुनिया की बात करें तो साल 2025 में सबसे अधिक महंगाई वाला देश वेनेजुएला रहा। इस दक्षिण अमेरिकी देश में पिछले वर्ष महंगाई दर 269.9% तक पहुंच गई। यह स्तर किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद गंभीर माना जाता है। कुछ समय के लिए डॉलराइजेशन की प्रक्रिया से हालात में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता, जरूरत से ज्यादा मुद्रा छापना, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और आर्थिक कुप्रबंधन ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

अन्य सबसे अधिक महंगाई वाले देश

वेनेजुएला पर कई देशों ने लगाए प्रतिबंध

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कार्यकाल के दौरान अमेरिका सहित कई देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला। परिणामस्वरूप स्थानीय मुद्रा ‘बोलिवर’ की कीमत में भारी गिरावट आई और महंगाई दर दुनिया में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। अत्यधिक महंगाई का अर्थ है कि लोगों की आय की तुलना में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम नागरिक की क्रय शक्ति लगातार कम होती जाती है और जीवनयापन कठिन हो जाता है।

क्यों होती है महंगाई?

आमतौर पर कम विकसित देशों में महंगाई दर ज्यादा देखने को मिलती है क्योंकि वहां केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली अपेक्षाकृत कमजोर होती है। कई बार सरकारें अल्पकालिक आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरत से ज्यादा मुद्रा छाप देती हैं, जिससे बाजार में नकदी बढ़ती है और कीमतों में उछाल आता है। इसके विपरीत विकसित अर्थव्यवस्थाएं और प्रमुख उभरते बाजार महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सख्त मौद्रिक नीतियों, ब्याज दरों में बदलाव और वित्तीय अनुशासन का सहारा लेते हैं।

भारत की स्थिति

भारत की स्थिति फिलहाल अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई दे रही है। 2.75% की खुदरा महंगाई दर कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में संतुलित मानी जा रही है। मजबूत मौद्रिक नीति, खाद्य कीमतों पर नियंत्रण और संतुलित आर्थिक प्रबंधन इसके प्रमुख कारण हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की नियंत्रित महंगाई दर यह संकेत देती है कि देश की अर्थव्यवस्था स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रही है।