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बांग्लादेश में 57 वर्षीय हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी की संदिग्ध मौत, शेख हसीना की पार्टी ने उठाए सवाल

Bangladesh Minority Attack: बांग्लादेश के बरीसाल में वरिष्ठ हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी का शव संदेहास्पद परिस्थितियों में मिला। अवामी लीग ने इसे हत्या और इतिहास मिटाने की साजिश बताया है। पढ़ें पूरी खबर...
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Sep 12, 2026
Hindu Journalist death Bangladesh, Bangladesh Nationalist Party
हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी की संदिग्ध परिस्थिती में मौत (फोटो सोर्स- IANS)

Hindu Journalist Death: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय और मीडियाकर्मियों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरीसाल जिले में बंगाली दैनिक ‘समकाल’ के ब्यूरो ऑफिस के अंदर 57 वर्षीय वरिष्ठ हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला। पुलक चटर्जी ‘समकाल’ के पूर्व ब्यूरो चीफ रह चुके थे और बरीसाल प्रेस क्लब के महासचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। वह लंबे समय तक बांग्लादेशी दैनिक ‘जुगांतर’ से भी जुड़े रहे। अचानक हुई इस घटना से स्थानीय मीडिया और अल्पसंख्यक समुदाय में डर का माहौल है।

पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। बरीसाल कोतवाली पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी अल मामून-उल इस्लाम ने बताया कि मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस हर पहलू से मामले की जांच में जुटी है।

अवामी लीग का आरोप, 'यह आत्महत्या नहीं, सोची-समझी साजिश'

इस घटना पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टी अवामी लीग ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। अवामी लीग के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि शव की तस्वीरों को देखने से साफ जाहिर होता है कि परिस्थितियां स्वाभाविक नहीं हैं। पार्टी का कहना है कि शव के दोनों पैर जमीन पर टिके थे और घुटने मुड़े हुए थे। ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति फंदे से नहीं लटक सकता। इसे जानबूझकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई है।

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और इतिहास मिटाने की कोशिश

अवामी लीग ने 2001 से 2006 के उस दौर को याद दिलाया जब देश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी का शासन था। पार्टी के अनुसार, उस दौर में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों, मंदिरों में तोड़फोड़ और हिंसा को पुलक चटर्जी ने एक निडर पत्रकार के रूप में उजागर किया था।

पार्टी ने कहा कि पुलक चटर्जी उस दौर के प्रमुख गवाह थे। एक अल्पसंख्यक, एक वरिष्ठ पत्रकार और संपादक के रूप में उनकी आवाज को दबाना वास्तव में इतिहास के पन्नों को मिटाने का प्रयास है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने आरोप लगाया कि देश में एक बार फिर असहमति की आवाजों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का दौर लौट रहा है। गौरतलब बात यह है कि बीते कुछ समय से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। जातीय चुनाव के दौरान भी हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें सामने आई थीं।

Updated on:
12 Sept 2026 01:53 pm
Published on:
12 Sept 2026 01:49 pm