
इज़रायल (Israel) के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने ईरान की सरकार के बारे में एक बड़ा दावा किया है। सीरिया (Syria) में जबल अल-शेख (माउंट हर्मोन) के दौरे के दौरान इज़रायली सेना को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि ईरान की सरकार गिरने की कगार पर है। इस दौरे पर उनके साथ इज़रायली रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ (Israel Katz) भी थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीरिया के इस इलाके में इज़रायली सेना का कब्ज़ा बना हुआ है।
नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान की इस्लामिक सरकार गिरने के बहुत करीब है। उन्होंने कहा, "अभी भी काम बाकी है। मुख्य काम ईरान में आतंकी शासन को खत्म करना है। हम इसके बहुत करीब हैं। हम जानते हैं कि यह पूरा शासन आखिरकार ढह जाएगा।"
नेतन्याहू ने आगे कहा, "हम किसी भी आतंकी सेना को अपनी बॉर्डर पर पैर जमाने नहीं देंगे।" नेतन्याहू पहले भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि अपने देश की बॉर्डर को सुरक्षित रहने के लिए वह हर ज़रूरी कदम उठाएंगे।
दक्षिणी सीरिया में दिसंबर 2024 में लंबे समय से शासक रहे बशर अल-असद (Bashar al-Assad) के सत्ता से हटने के बाद से ही इज़रायली सेना एक 'सिक्योरिटी ज़ोन' में तैनात है। इस पूरे इलाके पर इज़रायली सेना का कब्ज़ा है, जहाँ सेना की ही निगरानी रहती है। यह इलाका पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला एक बफ़र ज़ोन था। यह ज़ोन 1974 से इज़रायल के कब्ज़े वाले गोलान में इज़रायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता रहा है। असद के सत्ता से हटने के बाद से इज़रायल की सेना ने सीरिया में सैकड़ों हमले किए हैं। इससे जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं, इज़रायली सेना ने बार-बार सीरियाई इलाके में घुसपैठ भी की है।
इज़रायली मंत्रियों और अधिकारियों ने इस बारे में कई बार यह भी कहा है कि उनका देश 'सिक्योरिटी ज़ोन' में अपनी सेना बनाए रखेगा। पढ़कर मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि आखिर इज़रायल ऐसा क्यों करना चाहता है? दरअसल इसकी वजह है इज़रायल का प्लान, जिसके अनुसार वो इस इलाके में एक बड़ा असैन्य क्षेत्र बनाना चाहता है।