Pakistan: मृतक डॉक्टर के परिवार का कहना है कि उस पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया है। वहीं चरपंथियं की भीड़ ने परिवार को डॉक्टर का शव दफनाने भी नहीं दिया और जब परिवार ने शव को कार में छिपा दिय़ा तो ये चरमपंथी वहां भी पहुंच गए और कार में आग लगा दी, जिससे शव जल गया।
Pakistan: पाकिस्तान में ईशनिंदा करना एक डॉक्टर को इतना भारी पड़ गया कि उसे दिनदहाड़े पुलिस ने जान से मार दिया। उसका कसूर ये था कि उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था जिसे पाकिस्तान के कानून में ईशनिंदा (Blasphemy) कहा जाता है। पुलिस ने ये हत्य़ा डॉक्टर पर आरोप लगने के बस एक दिन बाद ही कर दी। पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर का नाम शाह नवाज़़ कुन्हबार था। बीते बुधवार को इस डॉक्टर के खिलाफ उमरकोट पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 295-सी के तहत ईशनिंदा का केस दर्ज किया था। डॉक्टर पर आरोप था कि उसने अपने Facebook अकाउंट से एक धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जो पाकिस्तान की नजर मे ईशनिंदा है। इस पोस्ट के खिलाफ धर्म विशेष के चरमपंथियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। दूसरी तरफ डॉक्टर के परिवार ने कहा है कि ईशनिंदा का डॉक्टर पर झूठा आरोप लगाया है और ये फर्ज़ी एनकाउंटर किया गया है।
बीते बुधवार को उमरकोट प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह इकट्ठा हुआ। प्रदर्शनकारियों ने डॉक्टर की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गाड़ियों में आग भी लगा दी थी। हालांकि रिपोर्ट में डॉक्टर को कथित आरोपी बताया गय़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक मामला दर्ज होने के बाद ये कथित आरोपी कराची भाग गया था, लेकिन बाद में उमरकोट पुलिस ने उसे पकड़ लिया और मीरपुरखास ले गई। वहां, सिंधरी पुलिस ने कथित तौर पर उसे एक कथित एनकाउंटर में मार दिया। हालांकि, पुलिस ने इस बात से इनकार किया कि उसे कराची में गिरफ्तार किया गया था।
सिंधरी स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) नियाज खोसो ने संदिग्ध की मौत की पुष्टि करते हुए दावा किया कि शाह नवाज और उसके साथियों ने पुलिस अधिकारियों पर गोलीबारी की। जवाब में, पुलिस ने डॉक्टर को गोली मारकर मार डाला, जबकि उसका साथी कथित तौर पर भाग गया। मीरपुरखास CIA पुलिस ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना सिंधरी में कांटा स्टॉप के पास स्नैप-चेकिंग के दौरान हुई थी।
एक दिन पहले, नवाज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें उसने कहा था कि उसका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया है और वो कभी भी ईशनिंदा से जुड़ी कोई सामग्री शेयर नहीं करेंगे। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक उमरकोट जिला मुख्यालय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि ये डॉक्टर 12 सितंबर से लापता थे।
ये मामला यहीं नहीं थमा, ईशनिंदा के इस मामले से लोग इतना ज्यादा संवेदनशील हो गए कि इस कथित एनकाउंटर में मरने वाले डॉक्टर का शव जब उसके परिवार को लौटाया जा रहा था तो गुस्साई भीड़ ने उनके परिवार पर हमला करने की कोशिश की और शव को छीनने की कोशिश की। आलम ये हो गया था कि परिवार को अपनी जान बचाने के लिए नबीसर थाप में शरण लेनी पड़ी, लेकिन धर्म विशेष के इन चरमपंथियों ने उनका वहां तक पीछा किया और कथित आरोपी डॉक्टर के शव को दफनाने के रोक दिया।
इसके बाद डॉक्टर का परिवार शव को दफनाए बिना ही अपने साथ ले आए और जनहेरो लौटकर शव को कार में छिपा दिया लेकिन भीड़ ने शव को कब्जे में लेकर आग लगा दी और शव वहीं कार में जल गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतक डॉक्टर के परिवार में उसकी पत्नी, तीन बेटे और एक बेटी है। परिवार ने बताया कि डॉक्टर नवाज़ 4 साल से मानसिक विकार से पीड़ित था। उसका भतीजा शाहिद, जो यू.के. में रहने वाला एक मनोचिकित्सक है, उसका इलाज कर रहा था और नियमित रूप से दवा लिख रहा था। उधर आयरलैंड में प्रैक्टिस करने वाले एक डॉक्टर के पारिवार से संबंधित डॉक्टर मातारो हिंगोरजो ने डॉन को बताया कि शाह नवाज एक बहुत धार्मिक शख्स था। वो दसवीं का टॉपर था, साथ ही एक बुद्धिमान, समर्पित राष्ट्रवादी जिसके पास एक मजबूत आध्यात्मिक पक्ष था।
डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर के इस पक्ष पर जवाब लेने के लिए SSP मीरपुरखास और अन्य पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।