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चांद पर होटल के लिए बुकिंग शुरू, 92 करोड़ हो सकता है एक रात का किराया

चांद पर होटल के लिए बुकिंग शुरू हो गई है। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।

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Jan 31, 2026
Hotel on moon (Representational Photo)

साइंस फिक्शन अब हकीकत में तब्दील होने जा रही है। अमेरिकी स्पेस स्टार्टअप 'गैलेक्टिक रिसोर्स यूटिलाइजेशन स्पेस' (जीआरयू स्पेस) ने चांद पर दुनिया के पहले स्थायी होटल (Hotel On Moon) के लिए बुकिंग विंडो खोल दी है। कंपनी का दावा है कि यह मानव इतिहास में पृथ्वी के बाहर बनी पहली स्थायी संरचना होगी और इसमें रुकने का अनुभव कमाल का होगा।

कितना होगा खर्च?

चांद पर बने इस होटल में रुकने के इच्छुक आवेदकों को दो श्रेणियों में बुकिंग का ऑप्शन दिया गया है। अनुभव के आधार पर उन्हें 2,50,000 डॉलर (लगभग 2.3 करोड़ रुपए) या 1 मिलियन डॉलर (करीब 9.2 करोड़ रुपए) की डिपॉज़िट राशि जमा करनी होगी। हालांकि रहने की अंतिम कीमत 100 लाख डॉलर (लगभग 92 करोड़ रुपए) प्रति स्टे होने की उम्मीद है जो एक रात का खर्च होगा। खास बात यह है कि केवल आवेदन पर विचार किए जाने के लिए ही 1,000 डॉलर (करीब 92 हज़ार रूपए) की नॉन-रिफंडेबल फीस देनी होगी। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2028 तक मंगल पर झंडा फहराने का संकल्प लिया है।

2031 में टेस्टिंग, 2032 में स्टे

जीआरयू स्पेस की योजना के अनुसार इस होटल को धरती पर एक 'इन्फ्लेटेबल स्ट्रक्चर' (फूलने वाली संरचना) के रूप में बनाया जाएगा और फिर चांद की सतह पर इसे विस्तार दिया जाएगा। कंपनी ने 2031 में इसके परीक्षण का लक्ष्य रखा है, जिसके ठीक एक साल बाद यानी 2032 में पर्यटक वहाँ पर पहली रात बिता सकेंगे। शुरुआत में इस होटल में चार मेहमानों के रहने की जगह होगी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 किया जाएगा।

कई कंपनियाँ कर रहीं फंडिंग

कैलिफोर्निया स्थित स्टार्टअप जीआरयू स्पेस को सिलिकॉन वैली के दिग्गजों का साथ मिल रहा है। इस प्रोजेक्ट को एनवीडिया, स्पेसएक्स और वाइ कॉम्बिनेटर और डिफेंस टेक फर्म एंडुरिल से जुड़े निवेशकों का भारी समर्थन हासिल है। यही कारण है कि कागज पर दिखने वाला यह प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतरता दिख रहा है।

होटल का जीवनकाल 10 साल होने का अनुमान

चांद पर होटल बनाना आसान नहीं है। लगभग 9,070 किलोग्राम का पेलोड चांद पर भेजा जाएगा। इस होटल का जीवनकाल 10 साल आंका गया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि तक इंसानी बसावट और सुरक्षा के दावे अभी पूरी तरह साबित होना बाकी हैं।

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