
इज़रायल (Israel) और फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास (Hamas) के बीच 7 अक्टूबर से चल रहा युद्ध अभी भी जारी है। हमास ने इज़रायल पर रॉकेट अटैक और घुसपैठ हमला किया था जिसमें करीब 1,200 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज़्यादा लोगों को हमास ने बंधक बना लिया था। इसके बाद इज़रायली सेना ने भी हमास से बदला लेते हुए गाज़ा (Gaza) और आसपास के फिलिस्तीनी इलाकों पर भीषण हमले शुरू करते हुए तबाही मचा दी। इज़रायली हमलों में 26 हज़ार से ज़्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। पर हमास से चल रही जंग में इज़रायल के भी 200 से ज़्यादा सैनिकों की मौत हो चुकी है। हमास अभी भी यह जंग लड़ रहा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि हमास के पास हथियार कहाँ से आ रहे हैं। ईरान (Iran) लंबे समय से हमास का समर्थक रहा है। पर इस युद्ध में हमास को हथियार सप्लाई करने का आरोप चीन (China) पर भी लगा है।
चीन का इनकार
हमास को हथियार सप्लाई करने के आरोप पर चीन ने प्रतिक्रिया जाहिर की है। चीन की सेना ने इस आरोप से इनकार करते हुए हमास को हथियार सप्लाई करने की बात का खंडन किया है। चीन की सेना के अनुसार उन्होंने कभी भी हमास को हथियार सप्लाई नहीं किए। चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने भी इस बारे में बयान जारी करते हुए इस आरोप को सिरे से नकार दिया और कहा कि चीन हमेशा अपनी रक्षा निर्यात नीति का पालन करता है और संघर्ष/युद्ध वाले इलाकों में हथियारों की सप्लाई नहीं करता है।
क्यों लगा चीन पर आरोप?
दरअसल इज़रायली सेना को गाज़ा में हमास के हथियारों के एक बड़ी खेंप मिली थी। ये सभी हथियार चीन में बने हुए थे। इसी वजह से चीन पर हमास को हथियार सप्लाई करने का आरोप लगा।
पहले भी लगा है ऐसा आरोप
यह पहला मौका नहीं है जब चीन पर एक युद्ध में किसी एक पक्ष को हथियार सप्लाई करने का आरोप लगा है। इससे पहले यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में भी चीन पर रूस को हथियार सप्लाई करने का आरोप लग चुका है। इसकी वजह रूस और चीन की दोस्ती बताई गई थी। हालांकि चीन ने इस आरोप को भी नकार दिया था।
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