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शक्सगाम घाटी को लेकर भारत-चीन आमने सामने, CPEC को लेकर बढ़ा विवाद

CPEC Corridor Controversy: चीन ने शक्सगाम घाटी पर भारत के दावे को खारिज करते हुए इसे अपना क्षेत्र बताया, जबकि भारत ने CPEC को अवैध करार दिया है।
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Jan 13, 2026
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भारत-चीन में टकरार (Patrika Graphic)

China Border Dispute: चीन और भारत के बीच शक्सगाम घाटी को लेकर एक बार फिर तनातनी बढ़ गई है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर भारत के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे चीन का क्षेत्र बताया। सीमा विवाद और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर पूछे गए सवालों के जवाब में माओ निंग ने कहा, “जिस क्षेत्र का आपने उल्लेख किया है, वह चीन का है। चीन को अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करने का पूरा अधिकार है।”

1960 के दशक के सीमा समझौते का हवाला

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने आगे दावा किया कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों देशों के बीच सीमा का सीमांकन किया गया था। माओ निंग ने इस समझौते को दो संप्रभु देशों द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग के रूप में बताया।

CPEC पर चीन की सफाई

‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, माओ निंग ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) एक आर्थिक सहयोग परियोजना है, जिसका उद्देश्य स्थानीय आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना और लोगों की आजीविका में सुधार करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता और CPEC, कश्मीर मुद्दे पर चीन के रुख को प्रभावित नहीं करते। माओ निंग ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस मामले पर चीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

भौगोलिक दृष्टि से अहम है शक्सगाम घाटी

भौगोलिक दृष्टि से शक्सगाम घाटी बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इसके उत्तर में चीन का झिंजियांग प्रांत, दक्षिण और पश्चिम में पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर (POJK) का उत्तरी क्षेत्र और पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर स्थित है।

भारत ने CPEC को बताया अवैध और अमान्य

इससे पहले 9 जनवरी को भारत ने शक्सगाम घाटी में CPEC के तहत चीन द्वारा किए जा रहे बुनियादी ढांचे के निर्माण को अवैध और अमान्य करार दिया था। भारत ने साफ कहा था कि यह इलाका देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।

MEA का कड़ा रुख

साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने 1963 के “तथाकथित” चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते और CPEC को कभी मान्यता नहीं दी है।

भारत ने दोहराया संप्रभुता का दावा

MEA प्रवक्ता ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत इस मुद्दे पर चीनी पक्ष के समक्ष बार-बार कड़ा विरोध दर्ज करा चुका है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

Updated on:
13 Jan 2026 11:53 am
Published on:
13 Jan 2026 11:52 am