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चीन में बढ़ रही बेरोजगारी, फैक्ट्रियों में ऑटोमैटिक हो रहा काम

China Job Crisis: चीन की अर्थव्यवस्था तो बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही देश में बेरोजगारी भी बढ़ रही है। क्या है इसकी वजह? आइए नज़र डालते हैं।
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Sep 08, 2026
China job crisis
चीन में बढ़ रही बेरोजगारी (Photo - Washington Post)

चीन (China) को लंबे समय से 'दुनिया की फैक्ट्री' कहा जाता था। चीन की फैक्टरियों में इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने, कपड़े, मशीनें और अन्य कई चीज़ें बनती हैं, जो दुनियाभर में सस्ती कीमतों पर भेजी जाती हैं। इस वजह से लंबे समय तक कई लोगों को रोजगार भी मिला। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। चीन की फैक्ट्रियों में अब उतने मजदूरों की ज़रूरत नहीं रही। रोबोट और ऑटोमेशन की वजह से अब काम ऑटोमैटिक हो गया है।

घट रहा है मैन्युफैक्चरिंग रोजगार

चीन में मैन्युफैक्चरिंग रोजगार तेज़ी से घट रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस वजह से करोड़ों नौकरियाँ चली गई हैं। चीन अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर है और निर्यात भी बढ़ा रहा है, लेकिन ऑटोमैटिक उत्पादकता बढ़ने से कम मजदूरों से ज्यादा उत्पादन हो रहा है। चीन दुनिया भर में लगने वाले औद्योगिक रोबोट्स का आधे से ज़्यादा हिस्सा लगा रहा है। कई फैक्ट्रियों में अब स्क्रू कसने और असेंबली का काम मशीनों द्वारा किया जा रहा है। मजदूर कहते हैं, “अब रोबोट हैं, लोगों की जरूरत नहीं।”

बढ़ रही है बेरोजगारी

चीन में बेरोजगारी बढ़ रही है। कई सेक्टर्स में बड़े लेवल पर लोगों की छंटनी हो रही है। युवा बेरोजगारी चिंता का विषय है। 16-24 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 15-16% है। इस साल रिकॉर्ड 1.27 करोड़ स्नातक जॉब मार्केट में आए, लेकिन कई लोगों को सैकड़ों आवेदन के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही है। नतीजा यह है कि स्थिर नौकरियाँ कम हो रही हैं। कई पूर्व फैक्ट्री मजदूर अब हर दिन काम ढूंढते हैं या कम वेतन पर असुरक्षित काम करते हैं। आय असमानता बढ़ रही है। ब्लू-कॉलर मजदूर पिछड़ रहे हैं। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) की वजह से भी कई नौकरियाँ जा रही हैं।

दुनिया की फैक्ट्री का बदल चुका है मॉडल

जिस चीन को एक समय पर दुनिया की फैक्ट्री कहा जाता था, अब उसका मॉडल बदल चुका है। सरकार हाई-टेक इंडस्ट्रीज़, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, एआई और रोबोटिक्स पर जोर दे रही है। इससे कुशल मजदूरों की मांग बढ़ी है, लेकिन कम कुशल मजदूरों के लिए विकल्प सीमित हैं। इससे स्किल्स का मेल नहीं बैठ पा रहा। युवा स्नातक सफेदपोश नौकरियाँ चाहते हैं, जबकि जरूरत तकनीकी ब्लू-कॉलर कौशल की है। यह संकट सिर्फ आर्थिक नहीं, सामाजिक भी है। चीन की जनसंख्या बढ़ती उम्र और घटती युवा आबादी का सामना कर रही है। करोड़ों लोगों के सामने रोजगार का संकट है। पुराने मजदूरों के लिए नई स्किल्स सीखना आसान नहीं। चीन अब कम मजदूरों के साथ ज़्यादा उत्पादन कर रहा है। तकनीकी तरक्की के साथ रोजगार और कौशल विकास का संतुलन नहीं बैठ पा रहा है।