
PM मोदी और ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन (सोर्स- आईएएनएस)
BRICS Summit 2026 India-Iran: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 (BRICS) से पहले भारत और ईरान के रिश्तों में नई हलचल दिख रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन 12-13 सितंबर को होने वाले समिट में शामिल होने भारत आ रहे हैं। उनके दौरे से पहले तेहरान ने भारत को एक अहम डिप्लोमैटिक पार्टनर बताया है। ईरान का कहना है कि वह BRICS के मंच का इस्तेमाल भारत के साथ कारोबार और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने के लिए करेगा।
ईरान ने खास तौर पर चाबहार पोर्ट और कनेक्टिविटी को अहम मुद्दा बताया है। ऐसे में पेजेशकियन का दौरा सिर्फ ब्रिक्स (BRICS) तक सीमित नहीं रहने वाला। इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भारत के साथ रिश्तों को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध बहुत पुराने और ऐतिहासिक हैं। ईरान BRICS और SCO जैसे मंचों पर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। खासकर ट्रेड और इकोनॉमिक कोऑपरेशन पर उसका जोर है।
बघाई के मुताबिक, BRICS समिट दोनों देशों के लिए बातचीत आगे बढ़ाने का अच्छा मौका है। तेहरान इस मौके का इस्तेमाल आपसी फायदे वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए करेगा। भारत के लिए भी यह मुलाकात अहम है। मिडिल-ईस्ट में बदलते समीकरणों और तेल-गैस संकट के बीच नई दिल्ली (भारत) ईरान के साथ अपने रिश्तों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है।
भारत और ईरान के रिश्तों में चाबहार पोर्ट की खास भूमिका है। यह पोर्ट भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का अहम रास्ता देता है। ईरान ने भी इसे दोनों देशों के लिए जरूरी प्रोजेक्ट बताया है। कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है।
भारत अपने ट्रेड बास्केट को भी बढ़ाना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने और उसमें विविधता लाने की इच्छा जताई है। यानी आने वाले समय में ऊर्जा, कनेक्टिविटी, व्यापार और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है।
किर्गिस्तान के बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात हुई थी। करीब दो साल बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों के कई पहलुओं पर चर्चा की। पश्चिम एशिया (मिडिल-ईस्ट) के हालात भी बातचीत का हिस्सा रहे। भारत ने साफ कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए। साथ ही शांति, स्थिरता और समुद्री व्यापार की आजादी को बनाए रखने पर जोर दिया गया। अब पेजेशकियन का भारत दौरा इसी बातचीत को आगे बढ़ाने का मौका देगा। BRICS के बड़े मंच पर होने वाली यह मुलाकात भारत-ईरान रिश्तों के लिए अहम साबित हो सकती है।
Updated on:
08 Sept 2026 03:45 pm
Published on:
08 Sept 2026 03:45 pm
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