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चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर झील फटने का खतरा टला, लेकिन मंडरा रहा दूसरा बड़ा खतरा

China Nepal Glacier Lake Burst: चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी झील का जलस्तर लगातार घट रहा है, जिससे अचानक झील फटने का खतरा फिलहाल कम हुआ है। हालांकि, हिमालयी क्षेत्र में दूसरी बड़ी झील और मलबे से बनी झीलों के कारण बाढ़ का खतरा बरकरार है। नेपाल और तिब्बत में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है।
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Aug 30, 2026
Nepal-Tibet flood devastation.
नेपाल के नुवाकोट में बाढ़ के बाद तबाही का मंजर। (Photo- IANS)

Nepal Flood: चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से बनी एक झील के अचानक फटने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, सैटेलाइट से मिले आंकड़ों में झील का आकार लगातार घटता दिखाई दे रहा है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हिमालयी क्षेत्र में अभी भी कई तरह की आपदाओं का खतरा बना हुआ है। खासकर ग्लेशियर के मलबे से बनी झीलों के अचानक टूटने से निचले इलाकों में बचाव और राहत अभियान प्रभावित हो सकते हैं।

बता दें कि बुधवार को नेपाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ के तेज बहाव में घर, वाहन, सड़कें और पुल बह गए, जबकि कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। इस आपदा में नेपाल और तिब्बत में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग लापता हैं।

लगातार घट रहा झील का आकार

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, सरकारी प्रसारक CCTV को दी गई जानकारी में बताया गया कि गुरुवार से शनिवार के बीच लिए गए सैटेलाइट चित्रों में पुरेपु त्सांगपो नदी पर बनी झील का पानी लगातार कम होता दिखा।

शनिवार सुबह तक झील का क्षेत्रफल करीब 99,000 वर्ग मीटर रह गया था। यह लगभग 14 फुटबॉल मैदानों के बराबर है। दो दिन पहले की तुलना में झील का क्षेत्रफल करीब 21,000 वर्ग मीटर कम हुआ है। शनिवार दोपहर तक झील के तल का कुछ हिस्सा भी दिखाई देने लगा था।

चीन की सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी चाइना एनेंग गुरुवार से झील की निगरानी कर रही है। इसके लिए रडार और ड्रोन का चौबीसों घंटे इस्तेमाल किया जा रहा है।

शुक्रवार को कुछ देर रोका गया था बचाव अभियान

शुक्रवार को झील से पानी के अचानक बाहर निकलने की घटना के बाद बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। हालांकि, अधिकारियों के आकलन के बाद खतरे को फिलहाल नियंत्रित माना गया और राहत एवं बचाव कार्य दोबारा शुरू कर दिया गया।

चीनी अधिकारियों के मुताबिक, जब तक झील से निकलने वाले पानी का बहाव नियंत्रण में रहता है और झील अगले दो से तीन दिनों में पूरी तरह खाली हो जाती है, तब तक बचाव अभियान सुरक्षित रूप से जारी रखा जा सकता है।

अधिकारियों ने यह भी कहा है कि यदि झील की स्थिति बिगड़ती है तो बचाव दलों को कम से कम 30 मिनट पहले चेतावनी देकर सुरक्षित स्थान पर हटाया जाएगा।

दूसरी और बड़ी झील ने बढ़ाई चिंता

हालांकि, खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अधिकारियों ने ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक दूसरी और बड़ी जलराशि की भी पहचान की है, जिस पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इस दूसरी झील का क्षेत्रफल 1,20,000 वर्ग मीटर से अधिक बताया गया है, लेकिन अभी इसकी गहराई का पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक दोनों झीलों का पानी पूरी तरह बाहर नहीं निकल जाता, तब तक बाढ़ का खतरा बना रहेगा।

नेपाल में 675 शव बरामद

चीन के ताजा अपडेट के बाद नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से मरने वालों की संख्या 691 हो गई है, जबकि 3,000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। चीन के अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत में 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, भोटेकोशी बाढ़ में मारे गए 675 लोगों के शव अब तक आठ जिलों से बरामद किए जा चुके हैं।

Updated on:
30 Aug 2026 08:22 am
Published on:
30 Aug 2026 08:22 am