
नेपाल में बाढ़ ने मचाई तबाही (Photo-X @Osinttechnical)
Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रासुवा समेत कई इलाकों में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई, जबकि बाढ़ और मलबे से घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। राहत और बचाव दल अभी भी मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं। इसी बीच अधिकारियों ने एक नए खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है।
टाइम्स नाउ ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में एक नई झील बन गई है, जिसका पानी अब बाहर निकलना शुरू हो गया है। विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर झील का प्राकृतिक बांध टूटता है, तो इससे नीचे की ओर अचानक बाढ़ आ सकती है।
चीन के सरकारी प्रसारक CCTV ने तस्वीरें जारी की है। जिनमें बताया गया कि नई झील उसी इलाके में बनी है, जहां बुधवार को ग्लेशियर के अलग होने की घटना हुई थी। इसी घटना के बाद इलाके में विनाशकारी बाढ़ आई थी।
नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों और शुरुआती आकलन से पता चला है कि नदी का प्रवाह ऊपर की ओर मलबे से बाधित हो गया है। इसके कारण वहां पानी जमा होकर एक झील का रूप ले चुका है। यदि इस झील का प्राकृतिक अवरोध टूटता है, तो अचानक नीचे की ओर बाढ़ आ सकती है।
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के जलवायु और पर्यावरणीय जोखिम विशेषज्ञ क्यूआंगगोंग झांग के अनुसार, यह झील 26 अगस्त को हुए बर्फ और चट्टानों के एवलांच के कारण बनी है। उन्होंने कहा कि झील का पानी अब बाहर निकलना शुरू हो गया है।
बताया जा रहा है कि यह झील समुद्र तल से करीब 2,950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह नेपाल-चीन सीमा पर स्थित जियारोंग पोर्ट से करीब 1,000 मीटर ऊंचाई पर है। यही सीमा क्षेत्र बुधवार की विनाशकारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। झील का प्राकृतिक अवरोध जियारोंग पोर्ट से 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, झील में जमा पानी की मात्रा करीब 1,200 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल के बराबर है।
बाढ़ में पहले ही बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। ऐसे में नई झील से पैदा हुआ संभावित खतरा राहत और बचाव अभियान के लिए एक और बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्लेशियर और आपदा जोखिम विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ पिघलने की प्रक्रिया अभी जारी है। यूनिवर्सिटी ऑफ ग्राज के जियोसाइंटिस्ट जैकब स्टीनर ने कहा कि क्षेत्र में तापमान अधिक होने के कारण ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं। नदी के रास्ते में बड़ी मात्रा में चट्टान और मलबा जमा होने के चलते कई जगहों पर पानी इकट्ठा हो सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि चेतावनी को गंभीरता से लेने की जरूरत है, लेकिन बुधवार को आई बाढ़ जितनी बड़ी एक और बाढ़ आने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा और नुवाकोट से बहकर गए शव चितवन, तनहूं, नवलपरासी और धादिंग तक पाए गए हैं। लगातार शव मिलने के कारण नुवाकोट, धादिंग और नवलपरासी के मुर्दाघरों में जगह की कमी हो गई है। स्थिति को देखते हुए कुछ शवों को पड़ोसी जिलों में भेजना पड़ा है।
Updated on:
29 Aug 2026 04:41 pm
Published on:
29 Aug 2026 04:41 pm
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