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Nepal Flash Flood: 30 मिनट में 9 मीटर बढ़ा जलस्तर: हिम-चट्टान हिमस्खलन ने नेपाल की नदियों को बनाया तबाही का सैलाब

Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, बाढ़ की शुरुआत ल्हेन्दे नदी से हुई।
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भारत

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Ashib Khan

Aug 27, 2026

Nepal glacier collapse

नेपाल में बाढ़ ने मचाई तबाही (Photo-IANS)

Nepal Flash Flood: नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अब तक 175 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि सैकड़ों लापता है। बाढ़ को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ ही समय में नदी का जलस्तर कई मीटर बढ़ गया। गाल्छी इलाके में महज 30 मिनट के भीतर जलस्तर करीब नौ मीटर तक बढ़ गया। फिलहाल राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

कैसे शुरू हुई तबाही?

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, बाढ़ की शुरुआत ल्हेन्दे नदी से हुई। बताया जा रहा है कि यह घटना नेपाल-चीन सीमा पर स्थित सीमा पार के इलाके से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुए भूस्खलन के बाद सामने आई।

उपग्रह तस्वीरों से इस इलाके में बड़े पैमाने पर स्थिति बदलती हुई नजर आ रही है। Planet Labs की तस्वीरों में पहले हरी-भरी दिखाई देने वाली पहाड़ी ढलानें अब भारी मात्रा में भूरे रंग के मलबे और तलछट से ढकी नजर आ रही हैं।

भारत की सिक्किम यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग जियोलॉजिस्ट विक्रम गुप्ता ने उपग्रह तस्वीरों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि तस्वीरें इस बात के मजबूत संकेत देती हैं कि ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा।

नेपाल के भूवैज्ञानिक प्रकाश पोखरेल ने भी इसे सीधे तौर पर बर्फ और चट्टानों के बड़े भूस्खलन से शुरू हुई फ्लैश फ्लड बताया है।

क्या भूकंप से टूटा ग्लेशियर?

हालांकि शुरुआत में इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि घटना के कुछ मिनट पहले आया भूकंप ग्लेशियर टूटने की वजह हो सकता है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि तिब्बत क्षेत्र में स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे भूकंपीय गतिविधि दर्ज की गई थी और करीब तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की खबर सामने आई।

हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार उस समय दर्ज भूकंपीय संकेत किसी सामान्य भूकंप के कारण नहीं, बल्कि ग्लेशियर से चट्टानों और बर्फ के टूटकर गिरने से पैदा हुआ था। वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक भूकंप के कारण हिमस्खलन शुरू होने की संभावना कम है।

पानी के साथ बहा मलबा, कई इलाके तबाह

ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने से भारी मात्रा में मलबा ल्हेन्दे नदी में पहुंचा। इसके बाद यह तेज बहाव भोटे कोशी नदी में गया और आगे त्रिशूली नदी में मिल गया। पानी की तेज धार अपने साथ मिट्टी, चट्टानें और बड़े-बड़े बोल्डर लेकर नीचे की ओर बढ़ी। इससे रास्ते में आने वाली सड़कें, पुल, इमारतें और बस्तियां बुरी तरह प्रभावित हुईं।

बता दें कि रसुवा और धादिंग सबसे अधिक प्रभावित जिलों में रहे। इसके अलावा बाढ़ का असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी ईस्ट तक पहुंचा।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सामने आई हवाई तस्वीरों में कई इलाकों में सड़कें और पुल पानी में डूबे या पूरी तरह बह चुके दिखाई दिए। जगह-जगह भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा है।

खतरा अभी टला नहीं

प्रशासन ने लोगों को नदियों के किनारे जाने से बचने की चेतावनी दी है। अधिकारियों के अनुसार, नदी में मलबे के कारण एक जगह पानी के पीछे एक झील जैसी स्थिति बन गई थी, जिसे पूरी तरह खाली नहीं किया जा सका था। ऐसे में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी से दूर रहने की सलाह दी गई है।