अमरीका का टिकटॉक (TikTok) पर बैन लगाया जाना दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच डेटा युद्ध का एक और उदाहरण जरूर है लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के दौर में इसे अंतिम कतई नहीं माना जा सकता। दोनों ही देश डेटा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की नीति पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अमरीका ने दरअसल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) की रूलबुक का एक नियम ही ड्रेगन की कंपनी टिकटॉक पर लागू कर दिया।
अमरीका का टिकटॉक (TikTok) पर बैन लगाया जाना दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच डेटा युद्ध का एक और उदाहरण जरूर है लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के दौर में इसे अंतिम कतई नहीं माना जा सकता। दोनों ही देश डेटा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की नीति पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अमरीका ने दरअसल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) की रूलबुक का एक नियम ही ड्रेगन की कंपनी टिकटॉक पर लागू कर दिया।
सालों से चीन (China) इंटरनेट के क्षेत्र में द ग्रेट फॉयरवॉल खड़ी करने की नीति पर चल रहा है और हाल में लीक हुए एक चीनी दस्तावेज 'डॉक्यूमेंट 79' के अनुसार, शी जिनपिंग ने सभी अमरीकी टेक कंपनियों की जगह चीनी विकल्प इस्तेमाल करने का आदेश दिया है, विशेषकर डेटा सेंसटिव सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में इसके लिए 2027 तक लक्ष्य रखा गया है। इसे ही 'डिलीट अमरीका' (Delete America) अभियान का नाम दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत सेना, ट्रेड, फाइनेंस, पोर्ट आदि सभी सेक्टर्स में अमरीकी सॉफ्टवेयर जैसे माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और ओरेकल आदि की जगह चीनी कंपनियों के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाना है। इतना ही नहीं, हार्डवेयर के क्षेत्र में चीन पहले ही इसको लागू कर चुका है, यही वजह है कि चीन में IBM, सिस्को और डेल (Dell) जैसी कंपनियों की मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
चीन से कोई डेटा बाहर नहीं जाए इसके लिए चीन में अनुमतियों का एक जटिल नेटवर्क लागू है। टेस्ला (Tesla) और Apple को अपना डेटा तो चीन में स्टोर करना ही होता है, इसके अलावा भी सरकारी प्रतिष्ठानों में इन कंपनियों के उपकरणों पर भी तमाम प्रतिबंध लागू होते हैं। सरकारी परिसर में टेस्ला वाहनों का प्रयोग सीमित और प्रतिबंधित है। पिछले ही सप्ताह एपल को अपने प्लेस्टोर से मेटा कंपनी के एप व्हाट्सएप और थ्रेड्स को हटाना पड़ा। हाल में टेस्ला को अपने ऑटो ड्राइव वाहनों की टेस्टिंग के लिए तभी अनुमति दी गई जबकि वह चीन नेविगेशन एप बायडू का ही इस्तेमाल करे।
अमरीका में 17 करोड़ उपयोगकर्ताओं वाले टिकटॉक जैसे एप को ही डेटा सुरक्षा के मद्देनजर प्रतिबंधित नहीं किया जा रहा। कई अन्य चीनी कंपनियां भी बाइडन प्रशासन के रडार पर हैं। फरवरी में बाइडन सरकार ने चीनी कंपनी शंघाई झेनहुआ हेवी इंडस्ट्रीज से खतरों के मद्देनजर बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए 20 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी।
- रिमोट सेंसिंग टेक्नॉलोजी पर रोकः अमरीका ने पिछले दिनों चीनी कंपनी हेसाइ समूह की लिडार रिमोट सेंसिंग टेक्नॉलोजी को अमरीका में प्रतिबंधित कर दिया था। चीनी सेना से संबंधों के आरोप में प्रतिंबधित कंपनी ने मामले को कोर्ट में ले जाने की धमकी दी है।
- ईवी वाहनों पर नजरः चीन की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी बाइड तमाम प्रयासों के बाद भी अमरीका में ज्यादा उपस्थिति नहीं बना सकी है। इसके बावजूद अमरीका मैक्सिको के जरिए कंपनी द्वारा अपने वाहन और उपकरण अमरीका में लाए जाने को लेकर उस पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है।
- बायोटिक कंपनी को हुआ अरबों का नुकसानः शंघाई स्थित बायोटेक चीनी कंपनियों वूशी ऐपटेक और वूशी बायोलॉजिक्स को पिछले महीने अमरीकी स्टॉक मार्केट में उस समय 21 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा जबकि अमरीकी सांसदों ने चीनी कंपनियों पर इस कारण प्रतिबंध लगाए जाने की मांग उठाइ कि वे अमरीकियों के बारे में आनुवंशिक जानकारी हासिल कर रही हैं।