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5 शर्तें और एक जिद! हिज्बुल्लाह ने इजरायल के साथ किसी भी समझौते को बताया ‘आत्मसमर्पण’

Hezbollah Ceasefire Conditions: हिज्बुल्लाह के नए प्रमुख नाईम कासिम ने इजराइल से सीधी बातचीत को खारिज कर दिया। उन्होंने युद्धविराम के लिए पांच सख्त प्रतिबंध बनाए रखा, जिससे लेबनान में शांति की अनिश्चितता बरकरार रही।

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Hezbollah Naim Qassem Speech

Hezbollah Naim Qassem Speech

Hezbollah Naim Qassem Speech: लेबनान में इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच हिज्बुल्लाह के नए प्रमुख शेख नीम कासिम ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इजराइल से किसी भी तरह की सीधी बातचीत को पूरी तरह से दोषी ठहराया है। कासिम ने कहा कि हिज्बुल्लाह इसराइल से कभी भी सीधी बातचीत नहीं करना चाहते। साथ ही उन्होंने युद्धविराम के लिए पांच स्पष्ट और सख्त धारियां रखी हैं, जो पूरी तरह से होने पर ही जंग को रोका जा सकता है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेबनान सरकार पर इजराइल और अमेरिका पर दबाव बढ़ रहा है। सरकार को इजराइल से कोई समझौता करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन हिज्बुल्लाह इसे लेबनान के हितों के खिलाफ बता रहा है।

लेबनान सरकार को दी कड़ी चेतावनी

कासिम ने लेबनान की सरकार को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा, जो लोग इजराइल और अमेरिका के बारे में सोच कर चल रहे हैं, वे न तो लेबनान का भला कर रहे हैं और न ही अपना हैं। कासिम का कहना है कि इजरायल और अमेरिका जो कुछ भी लेबनान सरकार से चाहते हैं, वह उनकी बस की बात नहीं है। जहां सरकार जो इजराइल से मांग रही है, वह उससे मिलने वाला नहीं है।

पांच बकाया क्या हैं?

हिज्बुल्लाह प्रमुखों ने युद्ध निषेध का पांचवां स्थान छोड़ा:
- इजराइल को जमीन, समुद्र और हवा से लेबनान पर सभी तरह के हमले पूरी तरह से बंद करने होंगे।
- इजराइल को पूरे यूरोप से अपनी फौजदारी हटानी होगी, जिस पर उसने कब्जा कर रखा है।
- इजराइल की जेलों में लेबनानी बंदियों को रिहा किया जाएगा।
- जो लोग युद्ध के कारण अपना घर-शहर खत्म कर देते हैं, वे वापस आकर पूरी तरह आज़ाद हो जाते हैं।
- युद्ध में हुई तबाही का पूरा पुनर्निर्माण किया जाए।

हिज्ब क्यों नहीं झुक रहा?

निमेम कासिम का यह बयान हिज़्बाबाद की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। संगठन को अभी भी हथियार नहीं चाहिए और इजराइल के साथ किसी भी तरह से अपने शेयरों पर अड़ा हुआ है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि ये प्रतिबंध इतने सख्त हैं कि इजराइल उन्हें आसानी से लाभ की स्थिति में नहीं रखता है।

लेबनान सरकार इस समय शेयर बाजार में फंसी हुई है। एक तरफ अमेरिका-इजरायल का दबाव तो दूसरी तरफ हिज्बोआ की सैन्य सेना। अगर सरकार हिज्बुल्ला को मंजूरी देकर इजरायल से हमला करती है तो संघर्ष में और बढ़ोतरी हो सकती है।

शांति की राह लंबी

यह घटनात्मक लेबनान में शांति स्थापना और जटिल बन रही है। 2026 में शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ है। हिज्बो ईरान का संगठन है और इजराइल को उसका अपना शत्रु बताया गया है।