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ट्रंप की धमकियों के बाद ईरान ने पड़ोसी देशों को दिया अल्टीमेटम, कहा- अब निशाना बनाया तो चार गुना तेज होगा हमला

Iran Warning To Gulf Countries: ईरान के उप राष्ट्रपति इस्माइल सगब इस्फहानी ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल के कुओं या इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, तो जवाब अब ईरान की तरफ से चार गुना ज्यादा तेज होगा।

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भारत

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Saurabh Mall

Apr 27, 2026

फोटो में अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई (सोर्स: ANI)

Trump-Iran Tensions: मिडिल-ईस्ट में तनाव अब चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनियों के बाद अब ईरान ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दिया है कि वे अमेरिका का साथ देने से बचें, वरना इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

ईरान के उप राष्ट्रपति इस्माइल सगब इस्फहानी ने दी चेतावनी

ईरान के उप राष्ट्रपति इस्माइल सगब इस्फहानी ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल के कुओं या इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, तो जवाब अब ईरान की तरफ से चार गुना ज्यादा तेज होगा।

इस्फहानी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान अब किसी भी हमले को हल्के में नहीं लेगा। अगर युद्ध जैसी कोई भी कार्रवाई होती है, तो ईरान उसका जोरदार जवाब देगा। खासतौर पर अगर नाकाबंदी के चलते उसके तेल के कुओं या दूसरे अहम ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया, तो जवाब चार गुना ज्यादा कड़ा होगा।

उनके मुताबिक, अगर ईरान के एक तेल का कुआं नुकसान होता है, तो बदले में चार कुओं के बराबर जवाब दिया जाएगा। यानी नुकसान का जवाब कई गुना बढ़ाकर दिया जाएगा।

ट्रंप ने दी थी धमकी

दरअसल, यह पूरा मामला तब और गरमा गया जब ट्रंप ने ईरान पर बढ़ते दबाव को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने इशारा किया कि अगर यही हाल रहा, तो ईरान की तेल को स्टोर करने या टैंकरों में भेजने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर दावा किया कि ईरान आर्थिक रूप से टूट रहा है। उनके मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए ईरान बेचैन है और हर दिन उसे करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि वहां की सेना और पुलिस को भी समय पर पैसे नहीं मिल रहे।

इसके बाद 'फॉक्स न्यूज' को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर यह दबाव जारी रहा, तो ईरान की तेल पाइपलाइन कुछ ही दिनों में संकट की स्थिति में पहुंच सकती हैं। इससे साफ है कि वॉशिंगटन की रणनीति का सबसे बड़ा निशाना ईरान का एनर्जी सेक्टर बन चुका है, जिससे क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।