अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच अपने सोशल मीडिया पोस्ट में घोषणा की कि पिछले दो दिनों से ईरान के साथ उत्पादक बातचीत चल रही है। उन्होंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि अगले पांच दिनों तक ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर कोई हमला न किया जाए।
ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना को नया ऑर्डर दिया है। उन्होंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वे ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अगले पांच दिनों तक कोई हमला नहीं करेंगे।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस बात की जानकारी दी है। साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया है कि ईरान के साथ पिछले दो दिनों से उनकी बातचीत चल रही है। यह बातचीत मिडिल ईस्ट में तनाव को कम करने की दिशा में है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत बहुत अच्छी और कारगर साबित हुई है।
उधर, ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (आईआरसीएस) के मुताबिक तेहरान ने अमेरिका-इजराइल के हमलों को लेकर इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में अपील की है। ईरान ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट और अन्य वैश्विक संस्थाओं को 16 औपचारिक पत्र सौंपे हैं।
पत्र में अमेरिका और इजराइली शासन द्वारा ईरान के खिलाफ बिना किसी उकसावे के की गई आक्रामक जंग की निंदा करने की मांग की गई है। यह कूटनीतिक पहल पिछले महीने के आखिर में शुरू हुई सैन्य हमलों की एक श्रृंखला के बाद सामने आई है।
आईआरसीएस की अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार मामलों की उप-प्रमुख रजिएह अलीशवंदी ने रविवार को कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से सक्रिय रूप से संपर्क कर रहा है ताकि अमेरिका-इजराइल के हमलों की निंदा में जरूरी कानूनी कदम उठाए जा सकें।
वहीं, इन प्रयासों के बारे में विस्तार से बताते हुए अलीशवंदी ने कहा कि IRCS, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द रेड क्रॉस और इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस के साथ रोजाना संपर्क बनाए हुए है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब तक मानवीय कानून पर ईरानी राष्ट्रीय समिति और ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी द्वारा पांच संयुक्त बयान जारी किए जा चुके हैं।
मौजूदा तनाव को ईरान पर गैर-कानूनी सैन्य आक्रामकता का एक नया दौर बताया गया है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था। यह तनावपूर्ण माहौल के उस दौर के बाद आया है, जो देश पर पिछले बिना किसी उकसावे के हुए हमलों के लगभग आठ महीने बाद पैदा हुआ है।
उधर, हवाई हमलों के जवाब में तेहरान ने बड़े पैमाने पर जवाबी हमले किए हैं, जिसमें मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. जिन्होंने इजराइल के कब्जे वाले इलाकों के साथ-साथ क्षेत्रीय देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी सफलतापूर्वक निशाना बनाया।