
पहियों पर जासूसी पैकेज । ( फोटो : ANI)
National Security : अमेरिका में अब चीनी वाहनों की एंट्री पर रोक लगाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, अमेरिकी डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों सांसदों का एक समूह चीनी ऑटोमोबाइल और उनके पार्ट्स अमेरिकी बाजार से बाहर रखने के लिए एक नया कानून ला रहा है। 'द एपोच टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में चीन के बढ़ते दबदबे को देखते हुए वाशिंगटन में यह खलबली मची हुई है।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर बनी 'हाउस सलेक्ट कमेटी' के अध्यक्ष रिपब्लिकन सांसद जॉन मुलेनार और डेमोक्रेटिक सांसद डेबी डिंगेल ने इस द्विदलीय बिल का ऐलान किया है। इन सांसदों ने एक साझा बयान में कहा कि आजकल की आधुनिक गाड़ियां चलते-फिरते डेटा-कलेक्शन सेंटर हैं, जो पल-पल की लोकेशन, यात्रियों की जानकारी और अहम ठिकानों को ट्रैक कर सकती हैं। उनका साफ कहना है कि अगर अमेरिकी गाड़ियों में चीनी हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ, तो इससे अमेरिका को सीधे तौर पर साइबर अटैक और जासूसी का खतरा होगा। यह प्रस्तावित कानून अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की लगातार मिल रही चेतावनियों का नतीजा है। इससे पहले भी अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने कुछ खास चीनी तकनीक वाले कनेक्टेड वाहनों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के नियम तय किए थे।
साल 2024 में पूर्व एफबीआई डायरेक्टर क्रिस्टोफर रे ने सांसदों को आगाह किया था कि 'वोल्ट टाइफून' जैसे चीनी सरकारी हैकिंग समूहों ने अमेरिकी इन्फ्रास्ट्रक्चर में सेंधमारी की है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि युद्ध या संकट के समय ये हैकर्स परिवहन जैसी जरूरी सेवाएं ठप कर सकते हैं। हाउस का यह नया बिल सीनेटर बर्नी मोरेनो और एलिसा स्लॉटकिन की ओर से लाए गए 'कनेक्टेड व्हीकल सिक्योरिटी एक्ट ऑफ 2026' की ही तर्ज पर है। सीनेटर स्लॉटकिन ने चीनी गाड़ियों को "पहियों पर जासूसी मशीन" करार दिया था और घरेलू ऑटो उद्योग व देश की सुरक्षा के लिए कड़े कानूनों की मांग की थी।
इस बीच, 'इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फाउंडेशन' ने भी इस कदम का समर्थन किया है। उनका कहना है कि चीनी इवी कंपनियों को अपनी सरकार से भारी मदद मिलती है और वे बीजिंग के आर्थिक हथकंडे के रूप में काम कर रही हैं। 'द एपोच टाइम्स' के अनुसार, 2009 से 2023 तक चीन ने अपने इवी सेक्टर को 230 अरब डॉलर से ज्यादा की सब्सिडी दी है।
अमेरिकी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने इस द्विदलीय कदम का जोरदार स्वागत किया है। उनका मानना है कि चीन की 'सस्ती और स्मार्ट' कारों के पीछे अमेरिका के महत्वपूर्ण डेटा की चोरी का एक गहरा साइबर खतरा छिपा हुआ है।
यह बिल पेश होने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस पर कितनी जल्दी मुहर लगाता है और क्या चीन इसके जवाब में अमेरिकी कंपनियों (जैसे टेस्ला या एप्पल) पर कोई पलटवार करता है। इस विवाद का दूसरा पहलू यह भी है कि ग्लोबल इवी मार्केट में चीन का एकाधिकार टूट रहा है। अमेरिका अब न सिर्फ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि अपने घरेलू ऑटो उद्योग को चीनी सब्सिडी वाली सस्ती कारों की प्रतिस्पर्धा से भी बचाना चाहता है। (इनपुट: ANI)
Updated on:
10 May 2026 07:21 pm
Published on:
10 May 2026 07:20 pm
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