अराष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के विषय में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस बयान में रूस और चीन का भी ज़िक्र किया।
अमेरिका (United States Of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जब से दूसरी बार कार्यभार संभाला है, तभी से ग्रीनलैंड (Greenland) पर उनका रुख साफ रहा है। वह कई बार ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात कह चुके हैं। ग्रीनलैंड, डेनमार्क (Denmark) और दुनियाभर के कई देश इस मामले में ट्रंप का विरोध कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति अपने रुख पर कायम हैं। इस मामले में अब ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है।
मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "हम ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कुछ करेंगे, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो, क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा कर लेंगे और तब हम रूस या चीन को पड़ोसी के रूप में नहीं रखना चाहेंगे। मैं आसान तरीके से समझौता करना चाहता हूं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हो पाया तो हम मुश्किल तरीका अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। जब कोई चीज़ हमारी होती है, तो हम उसकी रक्षा करते हैं। ओबामा ने ईरान के साथ जो भयानक समझौता किया था, उसका क्या नतीजा निकला, सबके सामने हैं। वो एक अल्पकालिक समझौता था। देशों को स्वामित्व का अधिकार होना चाहिए। हमें ग्रीनलैंड को अपने अधिकार में लेकर उसकी रक्षा करनी होगी, क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो चीन या रूस ऐसा करेंगे।"
ग्रीनलैंड मामले पर डेनमार्क (Denmark) की पीएम मेटे फ्रेडरिक्सन (Mette Frederiksen) ने ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर कोई भी ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने की कोशिश करेगा, तो डेनमार्क की सेना पहले गोली मारेगी और बाद में सवाल करेगी। फ्रेडरिक्सन ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्ज़े का किसी भी तरह का सैन्य प्रयास नाटो (NATO) के अंत का संकेत होगा। गौरतलब है कि अमेरिका के साथ ही डेनमार्क भी नाटो का सदस्य है।
ग्रीनलैंड एक स्वायत्तशासी क्षेत्र है, लेकिन डेनमार्क का हिस्सा है। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप (Europe) भी ट्रंप के खिलाफ है और उन्हें किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दी है।
ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्ज़े के बारे में ट्रंप कहते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह बहुत ज़रूरी है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो ग्रीनलैंड में रूस (Russia) और चीन (China) का प्रभाव बढ़ता जाएगा। हालांकि ट्रंप के 'ग्रीनलैंड मिशन' के पीछे सिर्फ यही वजह नहीं है। दरअसल ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ मिनरल्स का भंडार है, जिस पर लंबे समय से ट्रंप की नज़र है। जिस तरह ट्रंप ने वेनेज़ुएला (Venezuela) के तेल भंडार पर कब्ज़ा किया है, उसी तरह वह ग्रीनलैंड के रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार पर भी कब्ज़ा करना चाहते हैं।