
एपस्टीन फाइल में डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- वाशिंगटन पोस्ट)
Classified Documents : दुनिया के सबसे कुख्यात यौन अपराधी और अरबपति फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) की मौत के बाद भी उसके काले राज खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा दस्तावेजों ने एक नई और सनसनीखेज बहस को जन्म दे दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या एपस्टीन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों (CIA Connection) के लिए काम करता था? क्या वह एक 'एसेट' या मुखबिर था? यह सवाल किसी और ने नहीं, बल्कि खुद एपस्टीन के वकीलों ने उठाया था और एजेंसियों से इसके सुबूत मांगे थे।
दस्तावेज के मुताबिक, एपस्टीन के वकील मार्टिन वेनबर्ग और डैरेन के. इंडीके को शक था कि उनके मुवक्किल के तार अमेरिकी खुफिया तंत्र से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 2010 से 2014 के बीच सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम (FOIA) के तहत कई याचिकाएं दायर कीं। वे यह जानना चाहते थे कि क्या 1999 से 2011 के बीच एपस्टीन का CIA के साथ कोई "खुला या गोपनीय" रिश्ता था। वकीलों का मकसद यह साबित करना हो सकता था कि एपस्टीन अमेरिकी सरकार के लिए महत्वपूर्ण था, ताकि उसे कानूनी राहत मिल सके।
'न पुष्टि, न खंडन' अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का जवाब बेहद चौंकाने वाला था।
CIA (सीआईए): एजेंसी ने 2011 में जवाब दिया कि उन्हें किसी 'खुले रिश्ते' का रिकॉर्ड नहीं मिला। लेकिन जब बात 'गोपनीय संबंधों' (Covert Relationships) की आई, तो एजेंसी ने कहा कि वे न तो इसकी पुष्टि कर सकते हैं और न ही इसका खंडन (Confirm or Deny)।
NSA ( एनएसए ): राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने 2014 में और भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि एपस्टीन के बारे में जानकारी देने से "खुफिया स्रोत और तरीके उजागर हो जाएंगे," जिससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इस तरह के जवाब को जासूसी की दुनिया में 'ग्लोमर रिस्पॉन्स' कहा जाता है, जो अक्सर तब दिया जाता है जब मामला बेहद संवेदनशील हो।
एपस्टीन की कहानी में अब 'रूसी एंगल' भी जुड़ गया है। नए ईमेल्स से खुलासा हुआ है कि एपस्टीन के रूसी टेक निवेशकों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से गहरे संबंध थे। इन निवेशकों पर क्रेमलिन (रूसी सरकार) से जुड़े होने का शक था। इस खुलासे के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने पुष्टि की है कि उनकी सरकार एपस्टीन और रूसी खुफिया सेवाओं के बीच संभावित लिंक की नए सिरे से जांच कर रही है। हालांकि, रूस ने इन आरोपों को खारिज किया है।
रिपोर्ट में जो बाइडेन प्रशासन में मौजूदा CIA निदेशक विलियम जे. बर्न्स का नाम भी सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार, जब बर्न्स राजनयिक थे, तब उन्होंने एपस्टीन के साथ कई बैठकें की थीं। बर्न्स के प्रवक्ता ने सफाई दी है कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की जानकारी नहीं थी और उन मुलाकातों पर उन्हें अब गहरा पछतावा है।
इस खुलासे ने अमेरिका में "कॉन्स्पिरेंसी थ्योरीज" (षड्यंत्र सिद्धांतों) को हवा दे दी है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर एपस्टीन सिर्फ एक यौन अपराधी था, तो NSA को यह कहने की क्या जरूरत थी कि जानकारी देने से "राष्ट्रीय सुरक्षा" को खतरा होगा? मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार अब भी बहुत कुछ छिपा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों का एक साइड एंगल यह भी है कि क्या एपस्टीन 'डबल एजेंट' था? यानी क्या वह अमेरिका और रूस दोनों के लिए काम कर रहा था? उसके पास दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों के वीडियो और राज थे। यह शक गहराता जा रहा है कि क्या खुफिया एजेंसियां जानबूझकर उसे काम करने दे रही थीं ताकि वे विदेशी नेताओं और राजनयिकों को ब्लैकमेल करने के लिए उसके 'नेटवर्क' का इस्तेमाल कर सकें?
Published on:
09 Feb 2026 02:11 pm
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