
Ebola Vaccination: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला प्रकोप के केंद्र इतुरी प्रांत में शनिवार को टीकाकरण का दायरा बढ़ाया गया। प्रांतीय राजधानी बूनिया में 'BRAVO' नामक टीकाकरण अध्ययन की शुरुआत हुई। देश में अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को 'एर्वेबो' वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
यह अध्ययन 'मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स' (MSF) कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों, अफ्रीका CDC और अन्य वैज्ञानिक सहयोगियों के साथ मिलकर कर रहा है। शिन्हुआ के अनुसार, प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित इतुरी और नॉर्थ किवु में लगभग 20,000 फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगाया जाएगा और प्रतिभागियों पर नजर रखी जाएगी। नौ से 12 महीने चलने वाले इस ट्रायल में तीन महीने टीकाकरण और कम से कम छह महीने निगरानी शामिल है।
अगस्त में 'इंटरनेशनल कोऑर्डिनेटिंग ग्रुप ऑन वैक्सीन प्रोविज़न' ने DRC को 70,000 डोज की शुरुआती मंजूरी दी थी। इनमें 50,000 डोज स्वास्थ्य और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए और 20,000 फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल के लिए रखी गई हैं। अफ्रीका CDC के अनुसार, सितंबर के मध्य तक DRC को 16,520 डोज मिल चुकी थीं। 27 अगस्त से ही प्रोटोकॉल-आधारित कार्यक्रम के तहत ज्यादा जोखिम वाले लोगों को टीका लगाया जा रहा है।
'एर्वेबो' को जैरे वायरस के खिलाफ विकसित और लाइसेंस प्राप्त किया गया था, जबकि मौजूदा प्रकोप बंडिबुग्यो वायरस से फैला है। यह अभी साबित नहीं हुआ है कि वैक्सीन इंसानों को इस वायरस से बचा सकती है। इसे और बारीकी से परखने के लिए रैंडमाइज्ड रिंग-वैक्सीनेशन रणनीति पर आधारित एक अलग फेज 3 ट्रायल की भी योजना है।
मई में घोषित यह प्रकोप DRC में अब तक का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप है। 2014-2016 की पश्चिम अफ्रीका महामारी के बाद यह दुनिया भर में दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप है। सरकार के ताजा अपडेट के मुताबिक, 17 सितंबर तक 3,771 लोगों को टीका लगाया जा चुका था। इनमें त्शोपो प्रांत के 3,063 और बास-उएले प्रांत के 708 लोग शामिल हैं। देश में अब तक 7,541 कन्फर्म मामले सामने आए हैं, जिनमें 3,639 मौतें शामिल हैं। कुल मृत्यु दर 48.3 प्रतिशत है, जबकि 1,823 मरीज ठीक हो चुके हैं।