
हर देश के लिए उसकी सेना अहम होती है। हालांकि दुनिया में ऐसे भी देश हैं जहाँ सेना नहीं है। लेकिन जिन देशों में सेना है, वो चाहते हैं कि उनकी सेना मज़बूत हो। मज़बूत सेना के लिए अच्छे हथियारों के साथ ही सैन्यबल भी ज़्यादा होना चाहिए। यानी कि सैनिकों की संख्या। जितने ज़्यादा सैनिक होंगे, सेना का सैन्यबल उतना ही मज़बूत होगा। रूस के यूक्रेन पर हमले ने यूरोपीय देशों को सैन्य खर्च बढ़ाने और सेनाओं को मज़बूत करने के लिए प्रेरित किया है। इसके लिए यूरोप के कई देश अपनी सेनाओं में रंगरूटों की भर्ती पर विशेष बल दे रहे हैं लेकिन इसमें एक बड़ी दिक्कत आ रही है।
सेना से दूर हो रहे युवा
यूरोपीय देशों में सेनाओं में नए सैनिकों की भर्ती में कमी देखने को मिल रही है। इसकी वजह है युवाओं का सेना से दूर होना। यूरोपीय देशों के युवा सेना में अपना करियर नहीं बनाना चाहते।
सैन्यबल सिकुड़ रहा है
यूरोपीय देशों में पिछले एक दशक में सैन्यबल लगातार सिकुड़ा है। नए निवेश और भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव के बावजूद भी कोई सकारात्मक बदलाव नजर नहीं आता।
लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रहे देश
यूरोप के कई देशों ने इस बात को माना है कि वो अपनी सेना में नए सैनिक तो चाहते हैं, पर इसके लिए उन्होंने जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई सैनिकों के इस्तीफा देने के मामले भी बढ़ रहे हैं।
अप्रवासियों में तलाश रहे संभावनाएं
स्पेन, फ्रांस और पुर्तगाल जैसे देश अपनी सेना को मज़बूत बनाने के लिए अप्रवासियों को सेना में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं।