
Middle East Crisis: मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया विश्लेषण के अनुसार, यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब और क्षेत्र में अन्य सामरिक ठिकानों पर सटीक मिसाइल व ड्रोन हमले करने के लिए रूसी उपग्रहों (satellites) से मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सरकारी हथियारों के जखीरे पर कब्जा, बाहरी समर्थन और व्यापक सैन्य विकास ने हूती विद्रोहियों को एक शक्तिशाली हथियार भंडार बनाने में सक्षम बनाया है। एक जांच से पता चला है कि रूसी उपग्रह, ईरान-समर्थित हूतियों को सऊदी अरब के सैन्य और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करने में मदद कर रहे हैं। इससे ईरान के खिलाफ अमेरिका के युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उथल-पुथल और बढ़ गई है।
सऊदी अरब समर्थित, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार और हूतियों के बीच संघर्ष जुलाई से चल रहा है। सितंबर में यह संघर्ष तब और तेज हो गया, जब विद्रोही समूह ने यमन के लाल सागर तट पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया।
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