
पोलैंड में संवैधानिक संकट (फ़ोटो- X@Foxnews)
Poland Constitutional Crisis: पोलैंड में न्यायपालिका की स्वायत्तता और उस पर नियंत्रण को लेकर कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच टकराव शुरू हो गया है। राजधानी वारसॉ में स्थित देश की सर्वोच्च अदालत कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष बोगदान श्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टलोमी सोचान्स्की को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। जिसके बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी अदालत के बाहर जमा हो गए, जिसके चलते सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारी संख्या में दंगा-रोधी पुलिस बल को तैनात करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नाव्रोकी, जो एक आधिकारिक राजकीय यात्रा पर सेनेगल जा रहे थे, उन्हें बीच रास्ते से ही अपना विमान वापस मोड़ना पड़ा।
कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल की जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने अध्यक्ष बोगदान श्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी सोचान्स्की को निलंबित करने का आदेश जारी किया। उन पर आरोप लगाया गया कि वे संसद द्वारा कानूनी रूप से चुने गए जजों को अदालत की कानूनी कार्यवाहियों में हिस्सा लेने से गैरकानूनी ढंग से रोक रहे थे। मामले को और आगे बढ़ाते हुए देश के न्याय मंत्री वाल्डेमार ज़ुरेक ने आधिकारिक तौर पर इन दोनों जजों की न्यायिक छूट को खत्म करने की सिफारिश की है, जिससे उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है।
निलंबन की खबर सामने आते ही अदालत की वेबसाइट ऑफलाइन हो गई और परिसर के बाहर दक्षिणपंथी समर्थकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। भीड़ ने अदालत की सुरक्षा घेरेबंदी को तोड़ दिया और पुलिस अधिकारियों पर चीजें फेंकीं। जवाब में पुलिस ने बल प्रयोग किया और तीन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
वहीं, कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के मौजूदा नेतृत्व ने इस निलंबन को पूरी तरह से गैर-कानूनी करार दिया है। सोशल मीडिया पर जारी एक आधिकारिक बयान में ट्रिब्यूनल ने कहा की इस गैर-कानूनी कार्रवाई में शामिल सभी लोग देश की संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ 'तख्तापलट' जैसा गंभीर अपराध कर रहे हैं।
घटना के वक्त अफ्रीकी देश सेनेगल की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो चुके राष्ट्रपति करोल नाव्रोत्स्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "ऐसे नाजुक मोड़ पर राष्ट्रपति का पोलैंड में होना आवश्यक है। मैं सेनेगल की अपनी यात्रा को बीच में ही रोककर स्वदेश लौट रहा हूं।"
वारसॉ लौटने पर राष्ट्रपति सीधे संवैधानिक न्यायाधिकरण पहुंचे। जज मैसी बेरेक द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में, राष्ट्रपति नाव्रोट्जकी प्रवेश द्वार पर खड़े जजों के समूह को धकेलते हुए अंदर जाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। इस दौरान उनकी जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का के साथ बहस हुई।
पोलैंड की न्यायपालिका में चल रही यह उथल-पुथल कोई नई बात नहीं है। 2015 में सत्ता में आई राष्ट्रवादी और रूढ़िवादी पार्टी लॉ एंड जस्टिस (PiS) ने न्यायिक संस्थानों में कई बदलाव किए। आलोचकों का आरोप है कि इन बदलावों का मकसद न्यायपालिका पर राजनीतिक नियंत्रण स्थापित करना था। यूरोपीय संघ और यूरोपीय न्यायिक निकायों ने भी पोलैंड के न्यायिक सुधारों पर सवाल उठाए। इन विवादों के चलते, यूरोपीय संघ ने पोलैंड पर आर्थिक दंड भी लगाया।
2023 में जब डोनाल्ड टस्क के नेतृत्व में एक यूरोप समर्थक गठबंधन सत्ता में आई। इसने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बहाल करने और पिछली सरकार के दौरान किए गए बदलावों को पलटने का वादा किया। हालांकि, सरकार के इन प्रयासों को PiS से जुड़े लोगों के विरोध और नई नियुक्तियों को लेकर असहमति के कारण लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ा है।
प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने एक्स पर लिखा, "कानून के शासन को बहाल करना हमारा कर्तव्य है। PiS के नेतृत्व में बरसों तक चले अराजकता के दौर के बाद यह एक मुश्किल प्रक्रिया है, जो कभी-कभी परेशानी भी दे सकती है और इसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है। इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।"
अगस्त में, टस्क ने यह भी कहा था कि उनकी सरकार यह सुनिश्चित करने की योजना बना रही है कि कानूनी रूप से नियुक्त जज संवैधानिक न्यायाधिकरण में अपनी सही जगह ले सकें। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उनके तरीके शायद सभी को पसंद न आएं।
Updated on:
31 Oct 2026, 12:21 PM IST
Published on:
31 Oct 2026, 12:02 PM IST
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