
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंदेब पर अपनी पकड़ को और मजबूत कर लिया है। गुरुवार को महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा जमाने के बाद हूती लड़ाकों ने शुक्रवार को बाब-अल-मंदेब में स्थित रणनीतिक रूप से अहम मायून (पेरिम) द्वीप भी अपने कब्जे में ले लिया। यह द्वीप लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे स्वेज नहर से जोड़ने वाले समुद्री रास्ते के बीचों-बीच स्थित है। गौरतलब है कि इसी मार्ग से दुनिया भर के करीब 12% माल की ढुलाई होती है, जिससे इस कब्जे ने वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हूतियों के इस कब्जे के जवाब में सऊदी अरब ने शुक्रवार को मोखा एयरपोर्ट पर हवाई हमले किए, हालांकि इसमें अभी तक किसी की मौत या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हो पाई है। इससे पहले हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के जिजान, अबहा, नाजरान और खमिस मुशैत शहरों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिनमें सऊदी अधिकारियों के अनुसार 73 लोग घायल हुए। नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में जिजान स्थित अरामको की सुविधा के ऊपर काला धुआं उठता हुआ भी नजर आया है।
हूतियों की इस तेज बढ़त से चिंतित सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की और हूतियों के खिलाफ सीधी अमरीकी सैन्य कार्रवाई की मांग रखी। हालांकि ट्रंप ने यह अनुरोध ठुकरा दिया। फिलहाल अमरीका सीधे सैन्य हस्तक्षेप के बजाय सऊदी अरब को समर्थन देने और लाल सागर के समुद्री रास्ते को खुला रखने की रणनीति पर ही जोर दे रहा है।
अगस्त में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमले को तीनों पर हमला माना गया है। लेकिन पाकिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि हूती हमलों के जवाब में फिलहाल कोई सैन्य कार्रवाई विचाराधीन नहीं है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब को अपना समर्थन जताते हुए ईरान के साथ तनाव कम करने के लिए बातचीत पर भी जोर दिया है।