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होर्मुज संकट के बीच देश को मिला नया ट्रेड रूट, जानिए भारत के लिए कैसे संजीवनी बनेगा नया ट्रेड पैक्ट

India-Oman CEPA: भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच यह समझौता भारत को खाड़ी क्षेत्र में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध करा सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों, MSME, किसानों और कई उद्योगों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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Jun 01, 2026
India-Oman Trade Deal (AI Image)

India-Oman Trade Deal: भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है। ऐसे समय में यह समझौता प्रभावी हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र में एक वैकल्पिक व्यापार और ऊर्जा मार्ग खोल सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल मस्कट यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसके लागू होने की घोषणा करते हुए कहा कि यह समझौता भारतीय छात्रों, कारीगरों, महिलाओं, किसानों, मछुआरों और एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा करेगा। इससे निर्यात बढ़ेगा, निवेश आकर्षित होगा और रोजगार सृजन को गति मिलेगी।

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होर्मुज संकट के बीच क्यों अहम है यह समझौता?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत और समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

हाल के क्षेत्रीय तनाव और समुद्री गतिविधियों में व्यवधान के कारण इस मार्ग पर जोखिम बढ़ा है। ऐसे में ओमान की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। ओमान का बड़ा तटीय क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जुड़ा है, जिससे वहां के प्रमुख बंदरगाह संकट की स्थिति में भी संचालन जारी रख सकते हैं।

ओमान क्यों बन सकता है भारत का भरोसेमंद गेटवे?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, सलालाह और दुक्म जैसे ओमान के प्रमुख बंदरगाह होर्मुज मार्ग प्रभावित होने पर भी सुचारु रूप से काम कर सकते हैं। यही वजह है कि संघर्ष या अस्थिरता के दौर में ओमान भारत के लिए व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का भरोसेमंद केंद्र बन सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत का खाड़ी देशों से आयात काफी घटा, लेकिन ओमान अपवाद साबित हुआ। भारत का ओमान से आयात 246 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 430 मिलियन डॉलर से लगभग 1.5 अरब डॉलर पहुंच गया। इसका प्रमुख कारण कच्चे तेल और यूरिया की बढ़ी हुई खरीद रही।

भारत को क्या होगा फायदा?

समझौते के तहत ओमान ने अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय उत्पादों को शून्य शुल्क (Zero Duty) पहुंच प्रदान की है। इससे भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात को लाभ मिलेगा।

रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, खेल सामग्री, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को विशेष फायदा मिलने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ओमान को निर्यात लगभग 3.64 अरब डॉलर रहा, जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद, नैफ्था, एल्यूमिना, स्टील उत्पाद, मशीनरी और चावल प्रमुख रहे।

ओमान को क्या मिलेगा लाभ?

इसके बदले भारत भी लगभग 78 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क कम या समाप्त करेगा। ओमान भारत को कच्चा तेल, एलएनजी, उर्वरक, मेथनॉल और अमोनिया जैसे उत्पादों की आपूर्ति करता है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने ओमान से 7.2 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें कच्चा तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और उर्वरक सबसे बड़े हिस्से में रहे।

रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक लाभ तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता के बीच ओमान भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने वाला एक रणनीतिक साझेदार बनकर उभर सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह के व्यवधान की स्थिति में ओमान भारत के लिए एक वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित व्यापारिक मार्ग उपलब्ध करा सकता है, जिससे ऊर्जा और व्यापार दोनों क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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