
Abbas Araghchi China Visit: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर वैश्विक कूटनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का चीन दौरा कई सवाल खड़े कर रहा है। बीजिंग में होने वाली उनकी बातचीत को युद्ध विराम की संभावनाओं, क्षेत्रीय स्थिरता और बदलते अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया ऊर्जा सुरक्षा और शांति प्रयासों पर नजर बनाए हुए है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची 16 सितंबर को चीन पहुंचेंगे, जहां वह अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ महत्वपूर्ण वार्ता करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य टकराव के कारण क्षेत्रीय हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
इस खबर की पुष्टि चीन के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के हवाले से की गई है। Aljazeera ने चीनी विदेश मंत्रालय के बयान और क्षेत्रीय घटनाक्रमों के आधार पर इस दौरे की जानकारी दी है।
अराघची की बीजिंग यात्रा को ईरान की कूटनीतिक रणनीति के अहम हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। तेहरान इस समय अपने प्रमुख साझेदार देशों के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि क्षेत्र में बढ़ते दबाव के बीच राजनीतिक समर्थन हासिल किया जा सके। चीन भी पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने और संघर्ष को सीमित करने की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
अराघची और वांग यी की बैठक का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित अमेरिका यात्रा से पहले यह बातचीत हो रही है। शी के 24 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने की संभावना जताई गई है।
ऐसे में ईरान मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों और वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। बीजिंग लंबे समय से पश्चिम एशिया में बातचीत के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है।
ईरान संकट के साथ ही यमन और लाल सागर क्षेत्र की स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का कारण बनी हुई है। हालिया हूती ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने यानबू बंदरगाह से तेल लोडिंग गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। हालांकि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने संकेत दिया है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन संचालन जल्द दोबारा शुरू हो सकता है।
वहीं हूती विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षित है और उसने सऊदी अरब पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, यमन के पश्चिमी तट पर बढ़ती हिंसा के कारण एक लाख से अधिक लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं। इससे क्षेत्र में मानवीय संकट भी गहराता जा रहा है।
अराघची की चीन यात्रा से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई थी। उन्होंने सदस्य देशों से वैश्विक संघर्षों के समाधान में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
BRICS नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, संयम और अंतरराष्ट्रीय नियमों के सम्मान पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात में भी क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और व्यापार मार्गों की निरंतरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है, क्योंकि यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल है।
अब सभी की नजर बीजिंग में होने वाली अराघची-वांग यी वार्ता पर है। यह बैठक केवल ईरान और चीन के रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन और आने वाले दिनों की कूटनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है।