Iran Foreign Minister In Pakistan: ईरान के विदेश मंत्री इस्लामाबाद पहुंचे, जहां इशाक डार और आसिम मुनीर ने उनका स्वागत किया। वे क्षेत्रीय हालात और अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम पर चर्चा करेंगे, जिससे नए दौर की बातचीत की उम्मीदें बढ़ी हैं।
US-Iran Second Round Talks: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
अराघची शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचे। वे पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ क्षेत्रीय घटनाक्रमों और अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम पर चर्चा करने आए हैं। इससे पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत के दूसरे दौर की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।
उधर, अमेरिकी नेता भी ईरान से बातचीत (US-Iran Talks Latest Update) के लिए तैयार हैं। उन्हें पाकिस्तान की ओर से ग्रीन सिग्नल मिलने का इंतजार है। ऐसा माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे से फिलहाल डील चल रही है।
अगर अमेरिका की शर्तें ईरान मान लेता है तो यूएस के उपराष्ट्रपति जेडी वांस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो पाकिस्तान के लिए रवाना हो जायेंगे।
इस बीच, अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में कुछ ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि जेडी वांस को जान-बूझकर इन बातचीत से दूर रखा गया है, ताकि इस्लामाबाद में ये चर्चाएं बिना किसी रुकावट के हो सकें। लेकिन असल में बात ऐसी नहीं है।
व्हाइट हाउस का कहना है कि वे यह सुनना चाहते हैं कि ईरानियों का क्या कहना है? अगर उनकी बातों में कुछ महत्वपूर्ण, ठोस और समझौते की दिशा में आगे बढ़ने लायक बात होती है, तो वांस और रुबियो को इस्लामाबाद बुलाया जाएगा, ताकि वे इस समझौते को अंतिम रूप दे सकें।
इसके अलावा, कुछ प्रोटोकॉल (शिष्टाचार) से जुड़े मुद्दे भी हैं। उपराष्ट्रपति को बातचीत में शामिल होने के लिए अपने ही दर्जे के किसी व्यक्ति की जरूरत होती है, ताकि वहां जाने का उनका मकसद पूरा हो सके।
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेज रहे हैं। वही पाकिस्तान में ईरानी नेताओं के साथ डील करेंगे।
अमेरिका की ओर से शर्तें साफ हैं. उसने अपनी प्राथमिकताएं पहले ही स्पष्ट कर दी हैं। ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाने दिए जाएंगे।
इसके अलावा, अमेरिका ईरान के मिडिल ईस्ट में सक्रिय सहयोगी समूहों को मिलने वाले समर्थन पर भी चर्चा करना चाहता है। बातचीत में कई अहम सवाल शामिल हैं।
जैसे कि ईरान के पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम का क्या होगा और हॉर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण किसके पास रहेगा। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, इसलिए इसकी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद अहम है।
फिलहाल बातचीत को ‘फैक्ट-फाइंडिंग’ यानी संभावनाओं को परखने वाला दौर माना जा रहा है। अगर दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों में कुछ लचीलापन दिखाते हैं, तो समझौते की राह बन सकती है। लेकिन अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद कायम हैं।