China On Iran War: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच चीन ने ईरान को हथियार आपूर्ति के अमेरिकी आरोपों को खारिज किया। होर्मुज जलमार्ग पर बढ़ते खतरे के बीच चीन ने शांति और कूटनीति पर जोर दिया। होर्मुज जलमार्ग पर भी चीन ने अपनी बात रखी।
Iran Israel America War: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक बहस ने जोर पकड़ लिया है। अब इस मामले में चीन की भी एंट्री हो गई है। अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि चीन, ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम और कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले मिसाइल (MANPADS) देने की तैयारी कर रहा है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने साफ शब्दों में कहा कि ये आरोप न सिर्फ बेबुनियाद हैं बल्कि जानबूझकर चीन को गलत तरीके से जोड़ने की कोशिश भी हैं। उनका कहना है कि चीन हमेशा से सैन्य उपकरणों के निर्यात को लेकर बेहद सावधानी और जिम्मेदारी बरतता रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश अपने कानूनों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी सख्ती से पालन करता है।
असल में, यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन, ईरान की रक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। लेकिन चीन बार-बार यही दोहरा रहा है कि वह किसी भी संघर्ष में शामिल पक्ष को हथियार नहीं दे रहा। इधर, होर्मुज जलमार्ग को लेकर भी माहौल गरमाया हुआ है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में गिना जाता है। ऐसे में जब अमेरिका की ओर से इसे बंद करने की चेतावनी दी गई, तो चीन ने सभी देशों से संयम बरतने की अपील की।
चीन का मानना है कि इस जलमार्ग का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया के हित में है। चीन ने यह भी उम्मीद जताई कि जो देश इस विवाद में शामिल हैं, वे बातचीत का रास्ता अपनाएंगे और किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से बचेंगे। उसका कहना है कि तनाव कम करने के लिए कूटनीति ही सबसे बेहतर रास्ता है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता भी विफल रही थी। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका समझौता चाहता है जबकि ईरान कह रहा है कि अमेरिका डील करना ही नहीं चाहता है।