
Middle East Conflict:मिडिल-ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। US सेन्ट्रल कमांड के मुताबिक, 7 सितंबर तक 94 कमर्शियल जहाजों को दूसरी दिशा में भेजा गया। इस घटनाक्रम से ग्लोबल शिपिंग और एनर्जी ट्रेड को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है।
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (Supreme National Security Council of Iran) के सेक्रेटरी मोहसेन रेज़ाई (Secretary Mohsen Rezae) ने अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों और सैन्य ठिकानों को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
रेज़ाई के मुताबिक, अमेरिकी आर्थिक दबाव का जवाब समुद्री क्षेत्र में दिया जा सकता है। ईरान फारस की खाड़ी में एक नया ‘Maritime Exclusion Zone’ बनाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों पर कार्रवाई हो सकती है। इससे पहले भी ईरान होर्मुज को लेकर अपनी स्थिति साफ कर चुका है।
रेज़ाई ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान को धमकी देना या हमला करना बंद कर देता है, तो तेहरान होर्मुज को खुला रखने का वादा करेगा।
इस तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव (Military confrontation between Iran and America) के दावे भी सामने आए हैं। ईरान के ‘Islamic Revolutionary Guard Corps’ यानी IRGC ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और एक डिस्ट्रॉयर पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी युद्धपोत उसके जहाजों को परेशान कर रहे थे। साथ ही वे समुद्री नाकाबंदी में भी शामिल थे।
वहीं, US CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों ने कई ईरानी हमलों को नाकाम किया। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, इस दौरान किसी अमेरिकी कर्मचारी को नुकसान नहीं हुआ। अब सबसे बड़ी चिंता होर्मुज को लेकर है। यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता समुद्री तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।