
US-Iran missile attack: ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता खत्म होने के बाद हमले जारी हैं। गुरुवार को 12वें दिन भी अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। उधर, ईरान भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ब्लॉकेड जारी रखे हुए है। बीते दिनों हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर में धमाका हो गया और आग लग गई।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि तीन तेल टैंकर इस रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, जिनमें से एक में विस्फोट हो गया। बाकी दो टैंकर तुरंत वापस लौट गए। IRGC ने साफ चेतावनी दी है कि अमेरिका के बहकावे में आकर बिना ईरान की अनुमति के कोई भी जहाज इस इलाके से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसका भी यही हाल होगा।
इस घटना से एक दिन पहले अमेरिका ने ईरान पर 12वें दिन भी हमले किए। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई इलाकों को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अहवाज, रामशिर और अंडिमेश्क के पास मिसाइलें गिरीं। दक्षिणी ईरान में बूशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास बिजली घर को भी नुकसान पहुंचा। इराकी बॉर्डर के पास शालामचेह में अमेरिकी हमलों में दो लोगों की मौत हो गई। अमेरिका ने कहा कि ये हमले इसलिए किए गए हैं क्योंकि ईरान नागरिक जहाजों और व्यापारिक टैंकरों को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है। हम तब तक ईरान पर ऐसे हमले जारी रखेंगे, जब तक कि ईरान की क्षमताएं बिल्कुल खत्म न हो जाएं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अगर ईरान ने जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट या ड्रोन से हमला किया तो अमेरिका जवाब में एक ब्रिज या पावर प्लांट को तबाह कर देगा। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि यह तेहरान की राजधानी में भी हो सकता है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि उनकी देश "आंख के बदले आंख" की नीति अपनाएगा। किसी भी हमले या बुनियादी ढांचे पर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के बड़े तेल निर्यात का रास्ता है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच इस इलाके को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका उसके इलाके में उकसावा कर रहा है, जबकि अमेरिका कह रहा है कि वह क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। अभी स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। दोनों तरफ से चेतावनियां जारी हो रही हैं। अगर तनाव और बढ़ा तो पूरा इलाका और अस्थिर हो सकता है। दुनिया भर के देश इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि इससे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर रफ्तार पकड़ रही है जो 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। गोल्डमैन की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, यदि अमेरिका और ईरान का युद्ध फिर से लंबा चला तो क्रूड ऑयल के दाम प्रति बैरल 120 डॉलर के पार भी पहुंच सकता है। गोल्डमैन के रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से बढ़ने और फारस की खाड़ी में अनुमानित तेल फ्लो के युद्ध पूर्व स्तरों के 45 फीसदी से नीचे गिरने से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी है।